देश के कई हिस्सों में इस समय प्राकृतिक आपदाओं और मानवीय लापरवाही के कारण बड़ी दुर्घटनाएं सामने आ रही हैं। रविवार को झारखंड के धनबाद जिले में एक अवैध कोयला खदान धंसने से 4 मजदूरों की दर्दनाक मौत हो गई। बताया जा रहा है कि यह हादसा चिरकुंडा थाना क्षेत्र के सिजुआ इलाके में हुआ, जहां खदान में अवैध रूप से कोयला निकाल रहे मजदूर अचानक मलबे में दब गए। प्रशासन ने राहत-बचाव अभियान चलाया, लेकिन चार मजदूरों को बचाया नहीं जा सका।
वहीं मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर जिले में शनिवार रात भारी बारिश के चलते एक निर्माणाधीन पुल बह गया। यह पुल सिंगपुर गांव के पास नर्मदा नदी पर बन रहा था। गनीमत रही कि हादसे के वक्त कोई मौजूद नहीं था, जिससे जानमाल का नुकसान नहीं हुआ, लेकिन करोड़ों की लागत से बन रहा पुल बह जाने से स्थानीय लोगों में रोष है।

हिमाचल प्रदेश में मानसून का कहर जारी है। प्रदेश में अब तक बारिश और भूस्खलन से 75 लोगों की मौत हो चुकी है। शिमला, मंडी और कुल्लू जैसे पहाड़ी जिलों में लगातार लैंडस्लाइड और सड़कें बंद होने की घटनाएं हो रही हैं। कई गांवों का संपर्क टूट गया है। प्रशासन ने कई इलाकों में रेड अलर्ट जारी किया है।
इसके अलावा उत्तराखंड, असम और बिहार में भी भारी बारिश के चलते जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।
सरकार और प्रशासन पर उठ रहे सवाल:
बार-बार हो रही इन घटनाओं के बावजूद सुरक्षा इंतजाम और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। खदानों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी, अधूरी तैयारियों के साथ बनाए जा रहे पुल और मौसम की चेतावनियों के बावजूद पर्याप्त इंतजाम न होना आम जनता के जीवन को संकट में डाल रहा है।









