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भारत की पहली पंचवर्षीय योजना: विकास की नींव का पहला कदम

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भारत की स्वतंत्रता के बाद देश की सामाजिक और आर्थिक स्थितियों को सुदृढ़ करने की दिशा में योजनाबद्ध विकास की जरूरत महसूस की गई। इसी उद्देश्य से 1951 में पहली पंचवर्षीय योजना की शुरुआत की गई। यह योजना 1951 से 1956 तक लागू रही और इसका मुख्य उद्देश्य देश की कृषि व्यवस्था को मजबूत करना और खाद्य संकट से उबारना था।

योजना की पृष्ठभूमि
भारत स्वतंत्र तो हो चुका था, लेकिन विभाजन के बाद की परिस्थितियों ने देश को आर्थिक रूप से कमजोर बना दिया था। खाद्यान्न की कमी, बेरोजगारी, गरीबी और औद्योगीकरण की कमी जैसे मुद्दों से निपटने के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की अगुवाई में योजना आयोग (Planning Commission) की स्थापना 15 मार्च 1950 को की गई। इसके बाद पहली पंचवर्षीय योजना लागू की गई।

मुख्य उद्देश्य:
– कृषि उत्पादन में वृद्धि
– सिंचाई व्यवस्था का विस्तार
– भूमि सुधार और सहकारी खेती
– सामुदायिक विकास
– परिवहन और संचार का विकास

योजना के प्रमुख तथ्य:
– कुल बजट: 2,069 करोड़ रुपये
– कुल खर्च का 44.6% कृषि और सिंचाई पर किया गया
– योजना का मॉडल: हरोद-डोमर मॉडल
– इस योजना के अंत में भारत का राष्ट्रीय आय 3.6% की दर से बढ़ा, जबकि लक्ष्य 2.1% था

प्रभाव और उपलब्धियां:
– खाद्यान्न उत्पादन में वृद्धि हुई
– सिंचाई परियोजनाएं शुरू हुईं
– सामुदायिक विकास कार्यक्रमों का विस्तार हुआ

– ग्रामीण क्षेत्रों में कुछ हद तक रोजगार के अवसर बढ़े

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