बाकीमोगरा नगर पालिका में एक बड़ा विवाद उस समय सामने आया जब कुछ लोगों ने बिना किसी सूचना या आवेदन के नगर पालिका कार्यालय में आकर हंगामा मचाया। वायरल हो रहे वीडियो में देखा जा सकता है कि इन लोगों ने वहां कार्यरत महिला कर्मचारियों और पालिका अधिकारियों के साथ न सिर्फ दुर्व्यवहार किया बल्कि खुलेआम धमकाने और डराने की कोशिश भी की।
इस पूरे घटनाक्रम की सबसे चिंताजनक बात यह रही कि इन लोगों का नेतृत्व सांसद प्रतिनिधि प्रदीप अग्रवाल कर रहे थे, जिनकी पत्नी माया अग्रवाल स्वयं पूर्व में इसी नगर पालिका से निर्वाचित जनप्रतिनिधि रह चुकी हैं। ऐसे में यह सवाल उठता है कि जब परिवार से पहले ही एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि रह चुकी हों, तब ऐसी गैर-जिम्मेदाराना और उग्र मानसिकता आखिर क्यों?
प्रत्यक्षदर्शियों और स्टाफ के अनुसार, महिला कर्मचारी सुषमा निराला, जो कि अनुसूचित जाति वर्ग से आती हैं, के साथ अभद्र व्यवहार किया गया। यह घटना न केवल सामाजिक समरसता को ठेस पहुंचाती है बल्कि संविधान प्रदत्त गरिमा और सम्मान के मूल्यों का उल्लंघन भी है।
सिर्फ महिला कर्मचारी ही नहीं, बल्कि पालिका अधिकारी सुमित मेहता से भी धक्का-मुक्की की गई और अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए कहा गया — “नेतागिरी यहीं करूंगा!”
यह घटना केवल कर्मचारियों की कार्यक्षमता पर ही नहीं, बल्कि पूरे नगरीय प्रशासन पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करती है। 30 वार्डों की जिम्मेदारी उठाने वाली इस पालिका में पहले से ही मात्र 4 से 5 कर्मचारी कार्यरत हैं, ऐसे में अगर उन्हें डराकर, धमकाकर काम करने से रोका जाएगा तो आम जनता के कार्यों का निष्पादन कैसे होगा?
यह मामला अब नगर में चर्चा का विषय बना हुआ है। प्रशासन और कानून व्यवस्था पर नजरें टिक गई हैं कि क्या इस प्रकार के घटनाक्रम पर कोई ठोस कार्रवाई होगी या फिर नेतागिरी के प्रभाव में मामला दबा दिया जाएगा?







