हैदराबाद-
नागपुर की युवा ग्रैंडमास्टर दिव्या देशमुख ने शतरंज की दुनिया में भारत के लिए नया इतिहास रच दिया है। पहली बार महिला चेस वर्ल्ड कप में हिस्सा ले रही दिव्या ने सेमीफाइनल में चीन की पूर्व विश्व चैंपियन झोंगयी टैन को हराकर फाइनल में प्रवेश किया। इस जीत के साथ वह महिला चेस वर्ल्ड कप फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बन गई हैं।
101 चालों की ऐतिहासिक जीत
जॉर्जिया में चल रहे टूर्नामेंट के सेमीफाइनल के दूसरे गेम में दिव्या ने झोंगयी टैन को 1.5-0.5 के स्कोर से मात दी। यह मुकाबला बेहद कठिन और उतार-चढ़ाव से भरा रहा, जो 101 चालों तक चला। दिव्या का यह प्रदर्शन भारतीय शतरंज के लिए मील का पत्थर साबित हुआ है।
कैंडिडेट्स टूर्नामेंट के लिए भी क्वालिफाई
दिव्या अब सिर्फ वर्ल्ड कप फाइनल में ही नहीं, बल्कि वह कैंडिडेट्स टूर्नामेंट 2025 के लिए क्वालिफाई करने वाली पहली भारतीय महिला भी बन गई हैं। यह टूर्नामेंट मौजूदा महिला विश्व चैंपियन वेनजुन जू के खिलाफ अगली दावेदार तय करेगा।
सेमीफाइनल तक का सफर
क्वार्टर फाइनल में दिव्या ने चीन की दूसरी वरीयता प्राप्त झोंगसू झू को हराया।
इसके बाद उन्होंने साथी भारतीय ग्रैंडमास्टर डी. हरिका को मात देकर सेमीफाइनल में प्रवेश किया।
अब फाइनल में उनका मुकाबला चीन की एक अन्य खिलाड़ी से हो सकता है, जिसका फैसला जल्द होने वाला है।
दूसरे फाइनलिस्ट का इंतज़ार
दूसरे सेमीफाइनल में कोनेरू हम्पी और चीन की टिंगजी लेई के बीच मुकाबला ड्रॉ रहा। 75 चालों के बाद भी परिणाम न निकलने के कारण अब दोनों के बीच टाई-ब्रेकर मैच खेला जाएगा, जिससे दूसरे फाइनलिस्ट का निर्धारण होगा।
दिव्या देशमुख: बचपन से शतरंज की शौकीन
दिव्या का जन्म 9 दिसंबर 2005 को नागपुर में हुआ।
उन्होंने 5 साल की उम्र से शतरंज खेलना शुरू किया।
उनके माता-पिता दोनों डॉक्टर हैं और बेटी के हर कदम पर उसके साथ खड़े रहे।
2012 में महज 7 साल की उम्र में अंडर-7 नेशनल चैंपियनशिप जीतकर उन्होंने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।
उपलब्धियां जो प्रेरणा बन गईं
साल 2021 में दिव्या महिला ग्रैंडमास्टर बनीं — यह उपलब्धि हासिल करने वाली वह भारत की 22वीं महिला हैं।
फिर 2023 में उन्हें इंटरनेशनल मास्टर का टाइटल भी प्राप्त हुआ।
अब 2024 में उन्होंने वर्ल्ड कप के फाइनल तक पहुंचकर इतिहास रच दिया है।
अब नजरें फाइनल मुकाबले पर
28 जुलाई को खेले जाने वाले फाइनल में दिव्या देशमुख भारत की ओर से शतरंज के विश्व मंच पर इतिहास गढ़ने को तैयार हैं। उनका यह सफर केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि भारत की बेटियों के लिए एक प्रेरणा है।









