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भक्ति, सेवा और परंपरा का संगम : ग्राम पंचायत तरदा में 14 वर्षों से जारी सावनीय रामायण पाठ

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जांजगीर- चांपा संवाददाता- राजेन्द्र जयसवाल

भुवन प्रसाद कौशिक के निजी प्रयास से पूरे सावन माह गाँव में गूंजती है भक्ति-रस की धारा

जिला कोरबा, ग्राम पंचायत तरदा – आस्था, सेवा और परंपरा का ऐसा संगम बहुत कम देखने को मिलता है, जैसा कि ग्राम पंचायत तरदा में बीते दो दशकों से सावनीय रामायण पाठ के रूप में देखने को मिल रहा है। इस भक्ति पर्व की शुरुआत और निरंतरता का श्रेय जाता है गांव के श्रद्धालु भुवन प्रसाद कौशिक को, जिन्होंने बिना किसी सरकारी मदद या चंदा लिए, सिर्फ अपने निजी संसाधनों और सेवा-भावना से इस परंपरा को जीवित रखा है।

भक्ति की निरंतर गूंज

पूरे सावन माह, भुवन प्रसाद कौशिक के निवास पर प्रतिदिन रामायण पाठ, भजन-कीर्तन और प्रसाद वितरण का आयोजन होता है। वातावरण में गूंजते भक्ति-गीत और मंत्रोच्चार से गाँव का हर कोना आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठता है। सुबह से रात तक, बच्चे, युवा, महिलाएं और बुजुर्ग एक साथ बैठकर प्रभु श्रीराम की महिमा का श्रवण करते हैं।

विशेष समापन – रक्षाबंधन का आयोजन

सावनीय रामायण का अंतिम दिन, जो रक्षाबंधन पर पड़ता है, अपने आप में विशेष होता है। इस दिन रात 8 बजे से भोर 6 बजे तक अखंड रामायण पाठ और भक्ति-गायन चलता है। गाँव और बाहर से आए रामायण मंडलियां व भजन-कीर्तन दल इसमें शामिल होते हैं। समापन पर सभी भजन मंडलियों को श्रीफल और गमछा भेंट कर सम्मानित किया जाता है।

संपूर्ण खर्च – आस्था और सेवा से

इस आयोजन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि संपूर्ण खर्च भुवन प्रसाद कौशिक स्वयं वहन करते हैं। प्रतिदिन प्रसाद में खीर-पूड़ी, हलवा, सेव, मुसंबी, केला, नारियल आदि प्रेमपूर्वक वितरित किए जाते हैं। यह केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सेवा और समर्पण का उदाहरण भी है।

परिवार सक्रिय भागीदारी

इस परंपरा को जीवित रखने में भुवन प्रसाद कौशिक के पूरे परिवार का योगदान है। इस वर्ष आयोजन में रमेश कौशिक, राजकुमारी कौशिक, संजीव कौशिक, तमनी कौशिक, राजन कौशिक, श्रीमति धनी कौशिक, सत्यम, गुड्डू भाई कौशिक, शिवम् कौशिक, निधि कौशिक आदि की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।

आस्था से सामाजिक एकता तक

भुवन प्रसाद कौशिक का यह प्रयास न केवल प्रभु श्रीराम के प्रति श्रद्धा को जीवित रखता है, बल्कि गांव में आपसी प्रेम, भाईचारे और सामाजिक एकता को भी मजबूत करता है। उनका 14 वर्षों का यह निरंतर प्रयास आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

ग्राम पंचायत तरदा में सावनीय रामायण पाठ यह साबित करता है कि यदि आस्था सच्ची हो और सेवा-भावना दृढ़, तो परंपराएं न केवल जीवित रहती हैं, बल्कि पीढ़ी-दर-पीढ़ी समाज को जोड़ती रहती हैं।

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