स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले से राष्ट्र को संबोधित किया। उन्होंने देश की सुरक्षा, विकास, आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय संगठन की भूमिका पर कई महत्वपूर्ण बातें कहीं।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को बधाई
प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी वर्ष पर शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह संगठन पिछले 100 वर्षों से व्यक्ति निर्माण के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में लगा है। सेवा, अनुशासन और समर्पण इसकी पहचान है और यह दुनिया के सबसे बड़े सामाजिक संगठनों में से एक है। उन्होंने सभी स्वयंसेवकों के योगदान को नमन किया और कहा कि यह यात्रा आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।
ऑपरेशन सिंदूर और राष्ट्रीय सुरक्षा
उन्होंने पहलगाम में हुए आतंकी हमले का जिक्र करते हुए कहा कि देश ने इस पर कठोर कार्रवाई की। ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से सेना ने दुश्मनों को कड़ा संदेश दिया कि भारत अब किसी भी तरह की परमाणु धमकी या ब्लैकमेल को स्वीकार नहीं करेगा। आतंकवाद और उसे समर्थन देने वाले सभी को मानवता का शत्रु बताते हुए उन्होंने कहा कि भारत अब इनके खिलाफ एकजुट होकर कार्रवाई करेगा।
सिंधु जल समझौते पर कड़ा रुख
प्रधानमंत्री ने कहा कि सिंधु जल समझौते की वजह से दशकों से भारत के किसानों को नुकसान हुआ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश के हक का पानी अब सिर्फ भारत और उसके किसानों के लिए होगा। यह समझौता वर्तमान स्वरूप में देशहित में नहीं है और इसमें बदलाव आवश्यक है।
हाई पावर डेमोग्राफी मिशन की घोषणा
उन्होंने कहा कि देश की जनसांख्यिकी को बदलने की साजिशें की जा रही हैं, जिससे सुरक्षा और सामाजिक संतुलन को खतरा है। घुसपैठियों द्वारा आदिवासी क्षेत्रों की जमीन पर कब्जा भी चिंता का विषय है। इस चुनौती से निपटने के लिए सरकार हाई पावर डेमोग्राफी मिशन शुरू कर रही है।
आत्मनिर्भर भारत की आवश्यकता
प्रधानमंत्री ने कहा कि गुलामी के दौर ने हमें निर्धन और निर्भर बना दिया था, लेकिन अब आत्मनिर्भरता ही हमारी शक्ति का आधार होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि आत्मनिर्भरता केवल आर्थिक पहलुओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राष्ट्र की क्षमता, आत्मविश्वास और भविष्य की सुरक्षा से भी जुड़ी है।









