कोरबा।
बालको नगर के अंतर्गत संचालित अस्पताल में आयुष्मान भारत योजना के तहत गरीब मरीजों का इलाज बंद कर दिए जाने का गंभीर मामला सामने आया है। इस निर्णय से आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को भारी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है।
मरीज दीनदयाल यादव, जो टीबी की बीमारी से जूझ रहे हैं, इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती हुए थे। लेकिन उन्हें यह जानकारी मिली कि अस्पताल अब आयुष्मान कार्ड के तहत इलाज नहीं कर रहा है। यह सुनकर दीनदयाल और उनके परिजन परेशान हो उठे, क्योंकि निजी इलाज के लिए उनके पास आर्थिक साधन उपलब्ध नहीं हैं।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों द्वारा जब इस विषय पर अस्पताल प्रबंधन से बातचीत की गई तो आयुष्मान योजना का कार्य देख रहे कर्मचारी ने बताया कि अब केवल सर्जिकल मरीजों का ही इलाज आयुष्मान योजना से किया जा रहा है, जबकि सामान्य मरीजों को इससे वंचित कर दिया गया है। गौरतलब है की सर्जिकल चिकित्सा के मामलों से अस्पताल को अधिक आर्थिक लाभ होता है।
गौरतलब है कि बालको कंपनी 51% निजी और 49% सरकारी क्षेत्र की साझेदारी में संचालित है। ऐसे में गरीबों को सरकारी योजना से वंचित करना कहीं न कहीं प्रबंधन के गैर-जिम्मेदाराना रवैये को दर्शाता है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी का उदासीन रवैया
इस विषय में जानकारी और प्रतिक्रिया लेने के लिए स्थानीय पत्रकारों एवं जनप्रतिनिधियों ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी से संपर्क करने की कोशिश की। लेकिन बार-बार फोन करने के बावजूद उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया। इस रवैये ने स्वास्थ्य महकमे की संवेदनहीनता को उजागर कर दिया है। गंभीर मामले पर उच्च जिम्मेदार अधिकारी का चुप्पी साध लेना जनता के बीच असंतोष और अविश्वास को और गहरा कर रहा है।
प्रदेश में विष्णुदेव साय सरकार के गठन के बाद यह उम्मीद जताई गई थी कि गरीबों की सरकार गरीबों के हितों की रक्षा करेगी। लेकिन बालको अस्पताल की लापरवाही और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का गैर-जिम्मेदाराना रवैया प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है। जनता की मांग है कि स्वास्थ्य मंत्री, स्वास्थ्य विभाग और मुख्यमंत्री स्वयं संज्ञान लेकर त्वरित कार्यवाही करें ताकि गरीब और जरूरतमंद मरीजों को समय पर राहत मिल सके।







