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नारायणपुर के साकड़ीबेड़ा में स्कूलों की हालत जर्जर, नाटक स्टेज में लगती है बच्चों की क्लास

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छत्तीसगढ़ न्यूज़ नारायणपुर
जितेंद्र बिरनवार की रिपोर्ट

नाटक स्टेज में लगती है बच्चों की क्लास, जर्जर भवन और छत से टपक रहा पानी, सरकारी स्कूलों की यही कहानी –
नारायणपुर के साकड़ीबेड़ा में स्कूलों की हालत जर्जर है. बच्चों को नाट्य स्टेज वाली जगह पर बिठाकर पढ़ाई करवाई जा रही
नाटक स्टेज में लगती है बच्चों की क्लास August 22, 2025
नारायणपुर : जहां सरकार शिक्षा को लेकर नई योजनाओं और संसाधनों के वादे करती है, वहीं जमीनी हकीकत कुछ और ही तस्वीर पेश करती है. नारायणपुर जिले के साकड़ीबेड़ा गांव का उच्च प्राथमिक शाला भवन की हालत जर्जर हो चुकी है.छत का मलबा गिरने के बाद यहां के बच्चों को गांव के नाट्य मंडली प्रांगण में पढ़ाई करनी पड़ रही है बिल्डिंग खंडहर में तब्दील हो चुका है.इसके बाद जब हमने पूछा कि स्कूल के बच्चे कहां है तो जानकारी मिली कि सभी नाट्य मंडली के स्टेज में पढ़ते है
स्कूल की दीवारों में आ चुका है दरार

साकड़ीबेड़ा प्राथमिक शाला में छत से गिरा प्लास्टर
जर्जर स्कूल भवन में गिरा छत का हिस्सा : साकड़ीबेड़ा गांव का उच्च प्राथमिक शाला भवन लंबे समय से जर्जर अवस्था में है. बारिश के मौसम में छत से लगातार पानी रिसता है. बच्चों को टपकते छत के नीचे बैठकर पढ़ाई करनी पड़ती थी. लेकिन बीते दिन छत का एक हिस्सा भरभराकर नीचे गिरा.जिससे स्कूल के बच्चों और शिक्षकों में दहशत
छत से पानी टपकने के कारण स्कूल शिफ्ट
नाटक वाली जगह पर बच्चों की पढ़ाई

नाट्य मंडली स्थल को बनाया स्कूल:

इसके बाद शिक्षकों ने ग्रामीणों से चर्चा के बाद बच्चों की पढ़ाई जारी रखने के लिए गांव की नाट्य मंडली को ही अस्थायी स्कूल बना दिया.इस जगह पर गांव के धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रम होते हैं,जिससे अब बच्चों की पढ़ाई में व्यवधान पैदा हो रहा है.शिक्षकों का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए उन्हें यह कदम उठाना पड़ा, लेकिन यह स्थायी समाधान नहीं है.

खुले में बच्चों की क्लास लगने से आ रही दिक्कत
जर्जर भवन की दीवारों में 3 से 4 इंच तक चौड़ी दरारें आ चुकी हैं.किसी भी वक्त बड़ी दुर्घटना हो सकती है. बावजूद इसके अब तक जिम्मेदार विभाग और अधिकारी उचित प्रबंधन नहीं कर पाए हैं- तुकाराम साहू, शिक्षक

प्राथमिक शाला भवन भी जर्जर

वहीं उच्च प्राथमिक शाला भवन के साथ लगे प्राथमिक शाला भवन की स्थिति भी अत्यंत दयनीय और जर्जर है.यहां पहली से लेकर पांचवीं तक की कक्षाएं संचालित हो रही हैं. शाला भवन के खिड़कियां पूरी तरीके से टूट चुकी हैं. खिड़कियों से जंगली एवं जहरीले जीव जंतुओं के आने का खतरा बना रहता है.

प्राथमिक शाला भवन का भी हाल बेहाल
अफसरों ने दौरा किया लेकिन हालत जस की तस : वही प्राथमिक शाला भवन के छत की स्थिति उच्च प्राथमिक शाला भवन से कुछ ज्यादा अलग नहीं दिखी. बारिश में छत से पानी टपकने लगता है.यहां पर बैठकर अध्ययन एवं अध्यापन कार्य करना बेहद मुश्किल काम है. गांव में बच्चों की पढ़ाई के लिए कोई दूसरा उपयुक्त स्थान उपलब्ध नहीं है. जिससे अभिभावक और शिक्षक दोनों ही परेशान हैं. ग्रामीणों का आरोप है कि शिक्षा विभाग के अधिकारी कई बार दौरा कर चुके हैं, लेकिन अब तक भवन निर्माण या मरम्मत की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाया गय
ग्रामीणों ने पढ़ाई के लिए की वैकल्पिक व्यवस्था
साकड़ीबेड़ा गांव की यह स्थिति शिक्षा के अधिकार की असली तस्वीर को उजागर करती है. जर्जर भवन, अस्थायी कक्षाएं और असुरक्षित माहौल में पढ़ते मासूम बच्चों का भविष्य अधर में है. सवाल ये है कि कब तक जिम्मेदार अपनी आंखें मूंदे बैठे रहेंगे.आखिर कब इन बच्चों को शिक्षा का सही माहौल मिल सकेगा.

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