जांजगीर- चांपा संवाददाता- राजेन्द्र जयसवाल
गणेश एवं माता रानी की मूर्तियों उनके मूल स्वरूप निर्माण किया जाता है
यहा किसी भी प्रकार देवी एवं देवता की कार्टून मुर्ति नहीं बनाई जाती है जिला प्रशासन की दिशा निर्देश के अनुसार मूर्तियां बनाई गई हैं कमलपाल मूर्तिकार
जिला जांजगीर-चांपा : चांपा शहर में आगामी गणेश उत्सव को लेकर पूरे अंचल में माहौल भक्तिमय हो चुका है। प्रथम पूज्य भगवान गणेश की प्रतिमाओं को बनाने में मूर्तिकारों की व्यस्तता इस समय अपने चरम पर है। कहीं रंग-रोगन का काम चल रहा है तो कहीं अंतिम रूप देने की कवायद जारी है।
27 अगस्त को गणेश चतुर्थी
इस वर्ष गणेश चतुर्थी 27 अगस्त, बुधवार को मनाई जाएगी। परंपरा के अनुसार भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से दस दिनों तक चलने वाला गणेश महोत्सव धूमधाम से आयोजित किया जाएगा। इस अवधि में पूजा-अर्चना, रामायण पाठ, भजन-कीर्तन, डीजे साउंड और सांस्कृतिक कार्यक्रम पूरे वातावरण को भक्तिमय बनाएंगे।

मूर्तिकारों की कड़ी मेहनत
त्योहार में अभी पखवाड़े भर से अधिक समय शेष है, लेकिन मूर्तिकारों ने प्रतिमा निर्माण के साथ ही सजावट का कार्य भी शुरू कर दिया है। मिट्टी, रंग और सजावटी सामान से प्रतिमाओं को आकर्षक बनाने के लिए मूर्तिकार दिन-रात मेहनत कर रहे हैं।
मूर्तिकार कमल पाल ने बताया कि इस वर्ष रंग, सजावट और अन्य कच्चे माल की कीमतों में काफी बढ़ोतरी हुई है। इसके चलते प्रतिमाओं की कीमतें भी पिछले सालों की तुलना में अधिक होंगी।

बढ़ती कीमतों का असर
त्योहारों के मौसम में सजावट के सामान और रंगों की कीमतें हर वर्ष बढ़ती हैं, लेकिन इस बार मूर्तिकारों को अतिरिक्त दबाव झेलना पड़ रहा है। इसका सीधा असर भक्तों और पंडाल समितियों की जेब पर भी पड़ेगा। इसके बावजूद श्रद्धालु और समितियाँ गणेश प्रतिमाओं की स्थापना में कोई कमी नहीं छोड़ना चाहतीं।
भक्ति और उत्साह का संगम
गणेश महोत्सव के अवसर पर छोटे-बड़े पंडालों से लेकर घर-घर में गणपति बप्पा की स्थापना की तैयारी जोर-शोर से चल रही है। दस दिनों तक पूरे नगर और आसपास का क्षेत्र उत्साह, भक्ति और सांस्कृतिक कार्यक्रमों से गूंजेगा।









