लोक देवता बाबा रामदेव जी की जयंती भाद्रपद शुक्ल द्वितीया को मनाई जाती है। यह दिन उन महान संत को समर्पित है जिन्होंने समाज में जात-पात, ऊंच-नीच का भेद मिटाकर एक समरसता और समानता का संदेश दिया। बाबा रामदेव जी को ‘रुणिचा के राजा’ और ‘पीर रामशाह’ के नाम से भी जाना जाता है।
राजस्थान के रुणिचा में जन्मे बाबा रामदेव जी की ख्याति केवल हिन्दू समाज में ही नहीं, बल्कि मुस्लिम समाज में भी व्यापक है। उनकी समाधि पर हिन्दू-मुस्लिम दोनों समाज के लोग मत्था टेकते हैं, जिससे उनकी सर्वधर्म समभाव की भावना झलकती है।
इस दिन श्रद्धालु उपवास रखते हैं, मंदिरों में भजन-कीर्तन करते हैं और बाबा के सिद्धांतों को जीवन में अपनाने का संकल्प लेते हैं। उनके जीवन से हमें सेवा, त्याग और मानवता की सीख मिलती है।
बाबा रामदेव जी की जयंती न केवल धार्मिक उत्सव है, बल्कि यह सामाजिक एकता और मानव सेवा की प्रेरणा का भी पर्व है।









