भारत पर अमेरिका द्वारा लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ को लागू होने में अब चंद घंटे शेष हैं। इसी बीच मोदी सरकार सक्रिय हो गई है और प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) की ओर से इस मुद्दे पर आज उच्चस्तरीय बैठक बुलाई गई है। बैठक में अमेरिकी टैरिफ के असर का आकलन करने के साथ-साथ संभावित कदमों पर चर्चा की जाएगी।
अमेरिका ने रूस से सस्ते दाम पर तेल खरीदने को कारण बताते हुए भारत पर यह टैरिफ लगाया है। इसमें 25% बेस टैरिफ 7 अगस्त से लागू हो चुका है और 25% अतिरिक्त टैरिफ को पेनल्टी के रूप में जोड़ा गया है।
निर्यात पर असर और चिंताएँ
भारतीय सामानों पर इतने बड़े टैरिफ का असर खासतौर पर कपड़ा, लेदर, कैमिकल्स और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों पर पड़ेगा। निर्यातकों का मुनाफा घटेगा और अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पाद प्रतिस्पर्धा में टिकना मुश्किल होगा। इसी बीच वाणिज्य मंत्रालय भारतीय निर्यातकों और प्रमोशन काउंसिल के साथ लगातार बातचीत कर रहा है।
वैकल्पिक बाजारों की तलाश
सरकार की प्राथमिकता अब नए वैश्विक बाजारों—अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और दक्षिण-पूर्व एशिया—में भारतीय उत्पादों की पैठ बढ़ाना है। साथ ही घरेलू खपत को बढ़ावा देने और अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए जीएसटी सुधारों और अन्य नीतिगत कदमों पर भी विचार किया जा रहा है।
प्रधानमंत्री का स्पष्ट संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को अहमदाबाद में जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि भारत किसी भी दबाव के सामने झुकेगा नहीं। उन्होंने कहा – “मोदी सरकार अपने किसानों, मछुआरों और छोटे उद्यमियों के हितों के खिलाफ कोई भी नीति स्वीकार नहीं करेगी। चाहे कितना भी दबाव आए, हम अपनी ताकत और आत्मनिर्भर भारत अभियान के जरिए आगे बढ़ते रहेंगे।”









