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नारायणपुर पुलिस को नक्सल विरोधी अभियान में मिली बड़ी सफलता, भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री और हथियार बरामद

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बस्तर संवाददाता – अर्जुन झा

जगदलपुर। बस्तर संभाग के नारायणपुर जिला पुलिस द्वारा संचालित संयुक्त नक्सल विरोधी माड़ बचाओ अभियान में सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता हाथ लगी है। जिले के थाना कोहकामेटा थाना क्षेत्र के अबूझमाड़ के जंगल-पहाड़ में माड़ डिवीजन नक्सलियों के साथ हुई मुठभेड़ में अनेक नक्सलियों के हताहत होने की सूचना है। मुठभेड़ के बीच हथियारबंद सीनियर कैडर के नक्सली भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री एवं आवश्यक दैनिक उपयोगी सामग्री छोड़ कर भाग खड़े हुए फोर्स ने मौके से लाईट मशीन गन, एके-47 (त्रिची), इंसास, एसएलआर, स्टेन गन, जैसे अत्याधुनिक हथियारों सहित भारी मात्रा में बीजीएल सेल, डेटोनेटर, कार्डेक्स, के साथ 300 से अधिक सामग्री बरामद की है।

मिली जानकारी के अनुसार नारायणपुर डीआरजी, एसटीएफ और आईटीबीपी की टीम मूसलाधार बारिश एवं नदी नाले उफान पर होने के बावजूद लगातार 5 दिनों तक नक्सल विरोधी गश्त सर्चिंग अभियान चला रहे थे।
बस्तर रेंज के आईजी सुंदरराज पी., कांकेर रेंज के डीआईजी अमित तुकाराम काम्बले के मार्गदर्शन में नारायणपुर के पुलिस अधीक्षक रॉबिंसन गुड़िया अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, अक्षय साबद्रा, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ऑप्स अजय कुमार के नेतृत्व में चलाये जा रहे माड़ बचाओ नक्सल विरोधी अभियान में डीआरजी नारायणपुर, एसटीएफ और आईटीबीपी के संयुक्त दल को भारी मात्रा में में आर्म्स, एम्युनेशन, विस्फोटक सामग्री और नक्सल साहित्य बरामद करने में सफलता मिली है। उल्लेखनीय है कि एसपी रॉबिंसन गुड़िया के निर्देशानुसार 24 अगस्त को डीआरजी नारायणपुर, एसटीएफ और आईटीबीपी 38वीं वाहिनी, 41वीं वाहिनी और 45वीं वाहिनी की संयुक्त पार्टी टॉरगेट एरिया कसोड़, कुमुरादी, माड़ोड़ा, खोड़पार और गट्टाकाल की ओर नक्सल विरोधी अभियान के लिए वाना हुई थी। इसी दौरान कुतुल एरिया कमेटी के प्रभाव वाले क्षेत्र के जंगल पहाड़ में नक्सलियों द्वारा पुलिस को जान से मारने और हथियार लूटने की नियत से अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी गई। सुरक्षा बालों द्वारा आत्म रक्षा में की गई जवाबी कार्रवाई से भयभीत होकर नक्सली घने जंगल, नदी-नाले का फायदा उठाकर भाग निकले। मुठभेड़ स्थल का सर्च करने पर डीआरजी और एसटीएफ के जवानों को माओवादियों द्वारा डम्प किए गए भारी मात्रा मे आर्म्स, एम्युनेशन, विस्फोटक सामग्री और नक्सल साहित्य मिले। अबूझमाड़ क्षेत्र में हो रही मूसलाधार बारिश एवं नदी नाले उफान पर होने के बावजूद सुरक्षा बलों द्वारा लगातार 5 दिनों तक नक्सल विरोधी गश्त सर्चिंग अभियान संचालित किया गया।

अभियान में बरामद सामग्री
अभियान के दौरान फोर्स ने 7.62 एमएम की मय मैग्जीन एक नग लाईट मशीन, 51 एमएम की एक मोटार्र, मय मैग्जीन एक नग टिर्ची असाल्ट रायफल, एक नग एसएलआर, एक नग इंसास मय मैग्जीन, एक नग स्टेन गन मय मैग्जीन, दो नग 9 एमएम पिस्टल मय मैग्जीन, 02 नग देशी कट्टे, 315 के जिंदा कारतूस 10 राउंड, बीजीएल लांचर 8 नग, 303 रायफल 3 नग, 303 बट ब्रोकन 01 नग, 12 बोर 04 नग, 12 बोर बैरल 8 नग, भरमार बंदूक 49 नग, बीजीएल सेल बड़ा 23 नग, बीजीएल सेल मीडियम 63 नग, बीजीएल सेल छोटा 14 नग, देशी हैंडग्रेनेड 8 नग, हैंड ग्रेनेड 1 नग, तीर बम ब्रोकन 8 नग, कार्डेक्स वायर 02 बंडल, सेप्टी फ्युज 141 बंडल, 3 ज्वाइंट पाइप 5 फीट 1 सेट, गार्मीन जीपीएस 1 नग, गोल प्लेट 16 नग, डेटोनेटर इलेक्ट्रानिक 5 नग, फोर व्हीलर रिमोट स्वीच, 2 बैटरी, स्वीच 4 नग और नक्सल साहित्य बरामद किए हैं। सुरक्षा बलों की इस कार्रवाई से नक्सलियों को भारी मनोवैज्ञानिक तथा रणनीतिक क्षति होने के साथ-साथ उन्हें यह साफ संदेश गया है कि अब माओवादी माड़ के किसी क्षेत्र में सुरक्षित नहीं हैं। उनके आश्रय स्थल सिमटते जा रहे है। अब नक्सल मुक्त बस्तर की परिकल्पना साकार रूप ले रही है।

एसपी गुरिया की अपील
एसपी नारायणपुर रॉबिंसन गुरिया ने कहा है कि अबूझमाड़ दुर्गम जंगल एवं विकट भौगोलिक परिस्थतियों में रहने वाले मूल निवासियों को नक्सलवादी विचारधारा से बचाना और उन्हें माओवादी सिद्धांतों के आकर्षण से बाहर निकालना ही हमारा मुख्य उद्देश्य है, ताकि क्षेत्र में विकास एवं शांति कायम हो सके। हम सभी नक्सली भाई-बहनों से अपील करते हैं कि बाहरी लोगों की भ्रामक बातों और विचारधारा को त्याग कर शासन की आत्म समर्पण पुर्नवास नीति को अपनाकर समाज की मुख्यधारा से जुड़ें, हथियार एवं नक्सलवाद विचारधारा का पूर्णतः त्याग एवं विरोध करें। अब समय माड़ को वापस उसके मूलवासियों को सौंप देने का है जहाँ वे निर्भीक रूप से सामान्य जीवन व्यतीत कर सके। आईजी सुंदरराज पी. ने कहा कि वर्ष 2025 में माआवेादी संगठनों के शीर्ष नेतृत्व को सुरक्षा बलो द्वारा भारी क्षति पहुंचाई गई है। प्रतिबंधित एवं गैर कानूनी सीपीआई माओवादियों संगठन के पास अब हिंसा छोड़कर आत्मसमर्पण करने के अलावा और कोई विकल्प नही बचा है। अतः माओवादी तत्काल हिंसात्मक गतिविधियों को छोड़कर समाज की मुख्यधारा से जुड़ें।

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