सक्ती संवाददाता – चित्रंजय पटेल
लोकमान्य तिलक के संदेश प्रेरित है, विशेष पंडाल की गणेशोत्सव पूजा… अधिवक्ता चितरंजय पटेल
भारतीय संस्कृति एवं परंपरा में भगवान गजानन स्वामी को विघ्नहर्ता मानकर हर कार्य का श्री गणेश किया जाता है तो वहीं गणेश चतुर्थी पर गणपति मूर्ति स्थापना एवं पूजन का संबंध स्वतंत्रता संग्राम से है क्योंकि सर्वप्रथम गणेश मूर्ति स्थापन एवं गणेशोत्सव का आगाज लोकमान्य तिलक ने आजादी की लड़ाई को मजबूती प्रदान करने के लिए प्रारंभ किया था। अब सनातन परंपरा के अनुयाईयों ने इसे प्रथा के रूप में आत्मसात कर लिया है और हर स्थान पर गणेश चतुर्थी पर श्री गणेश मूर्ति का स्थापन और पूजन एक परंपरा बन गई है, इसी तारतम्य में नगर में गणेशोत्सव को अपने तरह से मनाने के लिए चिर_परिचित हुनरबाज अमित तंबोली ने इस बार शीश पेंसिल का पंडाल बनाकर उसमें गणपति बाबा के साथ ही मौलिश्वरवर महादेव को विराजित किया है, जो नगर में लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
अमित तंबोली के अनुसार उनके द्वारा लगातार 11 वर्षों से विशेष एवं आकर्षक और छोटा पंडाल बनाने का प्रयास किया जा रहा है तथा इस साल मात्र 36 इंच लंबा × 24 इंच चौड़ा और करीब 36 इंच के ऊंचे सबसे छोटे पंडाल में मौलिश्वर महादेव के साथ भगवान श्री गणेश जी विराजित है जिसे बनाने में लगभग 6885 नग कलर पेंसिल, पार्टिकल बोर्ड, कार्ड बोर्ड, ग्लू सटीक का उपयोग किया गया है तथा लगभग 84 घंटे का समय में बनकर तैयार हुआ है तथा इस कार्य मे उनके सुपुत्र अक्षत तंबोली के साथ पूरे परिवार का सहयोग रहा तथा इस हेतु सामग्री मानस अग्रवाल जी (शिव बुक सेंटर) के द्वारा कलर पेंसिल उपलब्ध कराई गई है। इस पंडाल में मूर्ति की स्थापन पूजन पंडित हरनारायण पाण्डेय ने कराया तो वहीं प्रतिदिन अंचल के गणमान्य ब्राह्मण बंधुओं के साथ ही सिद्ध हनुमान मंदिर परिवार के सान्निध्य में पूजन आरती संपन्न हो रहा है।
इस संबंध में श्री सिद्ध हनुमान मंदिर परिवार के अधिवक्ता चितरंजय पटेल ने बताया कि इस पंडाल में लोकमान्य तिलक की प्रेरणा फलीभूत होती नजर आती है क्योंकि प्रतिदिन अंचल के पंडितों के साथ विभिन्न समाज वर्ग के आमंत्रित पूज्य जनों के माध्यम से प्रभु की आरती_ पूजन संपादित कर सनातन एकता का संदेश फैलाने का प्रयास किया जा रहा है जो वर्तमान परिवेश में एक अनुपम प्रयास है।
आज की पूजन आरती में कथा वाचक मनोज शर्मा जी महाराज, श्री सिद्ध हनुमान मंदिर परिवार से नारायण मौर्य कोंडके, सोनू देवांगन, महेंद्र गबेल आदि के साथ नगर के लोगों की गरिमामय उपस्थिति रही।









