बस्तर संवाददाता – अर्जुन झा
बच्चों के बीच कराई गईं कई खेल प्रतियोगिताएं
बकावंड। हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद की 120वीं पर आज 29 अगस्त को डीएवी मुख्यमंत्री पब्लिक स्कूल उलनार मे कार्यक्रम का आयोजन किया गया।कार्यक्रम का शुभारंभ प्रार्थना सभा में मेजर ध्यानचंद के छायाचित्र के सम्मुख प्राचार्य, शिक्षक एवं कैबिनेट के कप्तान द्वारा पुष्पर्पित किया गया।

प्राचार्य मनोज शंकर ने अपने उद्बोधन में कहा कि मेजर ध्यानचंद ने सेवा में रहते हुए राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हॉकी प्रतियोगिताएं जीती और भारत का नाम रोशन किया। भारतीय हॉकी में उनके योगदान के लिए उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया गया।उन्होंने केवल मैदान पर ही अपनी वीरतापूर्ण प्रदर्शन से खेल में योगदान दिया बल्कि बाद के वर्षों में कोच के रूप में भी योगदान दिया। भारत सरकार द्वारा उनकी जयंती को राष्ट्रीय खेल दिवस के रूप में मनाया जाता है।उन्होंने बताया कि राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार को बदलकर मेजर ध्यान चंद पुरस्कार नाम रखा गया है।प्राचार्य ने कहा कि पढ़ाई के साथ ही शारीरिक विकास के लिए खेल भी आवश्यक होता है। खेल के क्षेत्र में भी जाकर हम अपना अच्छा भविष्य बना सकते हैं। कक्षा ग्यारहवीं के छात्र रविप्रकाश एवं हंसिका ने भी वक्तव्य प्रस्तुत किया।

शिक्षक देवसिंह नेताम ने मंच संचालन करते हुए मेजर ध्यानचंद के जीवन से सबको परिचित कराया। उन्होंने कहा कि भारत में हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद का नाम ऐसे लोगों में शुमार है जिन्होंने अपने खेल से भारत को स्वर्णिम सफलता दिलाने के साथ ही परंपरागत एशियाई हॉकी का दबदबा भी कायम किया है। मेजर ध्यानचंद को हॉकी का ‘जादूगर’ कहा जाता है क्योंकि वे अविश्वसनीय रूप से गेंद पर नियंत्रण रखते थे। उनका स्टिक-वर्क और बॉल कंट्रोल अद्भुत था। वे अपनी शानदार ड्रिबलिंग और गोल करने की क्षमता से दर्शकों को चकित कर देते थे। खेल शिक्षिका विजयलक्ष्मी साहू के निर्देशन में विद्यार्थियों ने विभिन्न खेलों की प्रस्तुति दी। इसके बाद कक्षावार विभिन्न खेलों का आयोजन किया गया। एलकेजी और यूकेजी के बच्चों के लिए चम्मच दौड़ और बिस्किट दौड़, पहली और दूसरी कक्षा के बच्चों के लिए रेडी टू गो, तीसरी और चौथी कक्षा के लिए फुगड़ी, पांचवीं और छठवीं कक्षा के लिए बोरा दौड़ और 100 मीटर दौड़, सातवीं और आठवीं कक्षा के लिए पित्तूल और बिल्ला, नवीं और ग्यारहवीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए रस्सीखींच और कबड्डी जैसे अनेक खेलों का आयोजन किया गया।
इन खेलों में सभी बच्चों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। विद्यालय के प्राचार्य ने बच्चों की प्रतिभा की प्रशंसा की और उन्हें आगे भी खेल और कला में उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित किया।









