(बस्तर संवाददाता – अर्जुन झा)
दूर दूर से संतान की चाह में आते हैं दुखियारे दंपत्ति
जगदलपुर। जिस बस्तर की रत्नगर्भा भूमि पर प्रभु रामचंद्र श्री चरण पड़े थे, वह बस्तर भूमि अति पावन है। बस्तर पर वन देवी के साथ ही दंतेश्वरी माई, बारसूर के गणेश जी, पतित पावनी इंद्रावती मैया, शंकिनी डंकिनी और शबरी जैसी पुण्य सलिला नदियों की भी कृपा सदियों से बरसती आई है। देवभूमि बस्तर की लिंगेश्वरी मैया की भी महिमा बड़ी न्यारी है। खास बात यह है कि मातारानी का दरबार साल में सिर्फ एक दिन भद्रपद की ग्यारस तिथि के दिन ही खुलता है और देश विदेश के भक्त दर्शन के लिए यहां पहुंचते हैं। इस साल भी यहां श्रद्धांलुओं का तांता लगना शुरू हो गया है।
माई लिंगेश्वरी का पावन धाम बस्तर संभाग के कोंडागांव जिले के फरसगांव ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायत आलनार के ग्राम अलुर के पास एक प्राचीन गुफा में स्थित है। लिंगेश्वरी देवी मंदिर अलुर में 3 सितंबर बुधवार को सुबह 5 से लेकर शाम 6 बजे तक श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ेगी। यहां देश विदेश से श्रद्धालु दर्शन करने और मन्नत मांगने आते हैं। 2 किलोमीटर से भी ज्यादा लंबी कतार श्रद्धालुओं की लगती है। श्रद्धालुओं के पहुंचने और कतार में लगने का सिलसिला दो दिन पहले से ही शुरू हो गया। इस मंदिर के कपाट साल में सिर्फ एक बार केवल 12 घंटे के खुलते हैं। मान्यता है है कि लिंगेश्वरी मैया की कृपा से सूनी गोद भर जाती है, जीवन की सारी बाधाएं, तकलीफें दूर हो जाती हैं। यहां आने वाले ज्यादातर दंपत्ति निसंतान होते हैं और संतान की चाह लेकर आते हैं। जिन्हें माता की कृपा से संतान सुख की प्राप्ति हो चुकी होती है ऐसे दंपत्ति माता के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने पहुंचते हैं। श्रद्धालुओं के लिए ग्रामीणों और मंदिर समिति की ओर से खीर, पूड़ी, खिचड़ी की व्यवस्था की जाती है। 3 सितंबर को लगने वाले मेले की सारी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। गुफा के अंदर किसी भी श्रद्धालु को प्रवेश नहीं करने दिया जाता, श्रद्धालु बाहर से ही देवी मां के दर्शन कर सकते हैं।









