बस्तर संवाददाता – अर्जुन झा
मिसाल बनी वन मंत्री कश्यप की संवेदनशीलता
अपना गम भुलाकर औरों के आंसू पोंछने में जुटे मंत्री
जगदलपुर। अपनी माटी, अपने लोगों से जुड़ाव की जो मिसाल छत्तीसगढ़ के वन मंत्री एवं नारायणपुर के विधायक केदार कश्यप अक्सर पेश करते रहते हैं। बस्तर संभाग में हालिया हुई अतिवृष्टि और भीषण बाढ़ से मची तबाही के दौर में मंत्री केदार कश्यप ने जो संवेदनशीलता दिखाई है, वैसी संवेदनशीलता और पहल के उदाहरण बहुत कम देखने सुनने को मिलते हैं। घर परिवार के लोग और स्वयं केदार कश्यप अभी गम के माहौल से उबर भी नहीं पाए हैं और वे अपना गम भुलाते हुए अपने एक बड़े कुनबे का दर्द गम साझा करने निकल पड़े।
वन मंत्री केदार कश्यप अपने विभागों से संबंधित अकर्मण्य अधिकारियों के लिए भले ही कड़क मिजाज हों, मगर अपनी अवाम के लिए वे निहायत ही नेक और रहमदिल हैं। श्री कश्यप की रहमदिली की नजीर हमें दंतेवाड़ा जिले में देखने को मिली। भारी बारिश और इंद्रावती नदी की बाढ़ ने बस्तर संभाग के बस्तर, दंतेवाड़ा और बीजापुर जिलों में बड़ी तबाही मचाई है। कई ग्रामीणों के मकान जमीदोज हो गए हैं, अनाज, पुस्तक कॉपियां, कपड़े और जरूरी सामान बह गए हैं। जानकारी मिलते ही वन मंत्री कश्यप पीड़ितों की मदद के लिए निकल पड़े। उन्होंने गांव गांव जाकर हालात देखे, लोगों की तकलीफ देखी और प्रशासन के अधिकारियों को पीड़ितों के घरों तक अनाज, कपड़े, रसोई ईंधन और तमाम जरूरी चीजें पहुंचाने के लिए निर्देशित किया। श्री कश्यप पूरी संवेदनशीलता के साथ पीड़ित ग्रामीणों के साथ खड़े रहकर उन्हें भरोसा दिलाते रहे कि संवेदनशील मुख्यमंत्री विष्णु देव साय जी के रहते किसी को चिंता करने की जरूरत नहीं है। आपकी तकलीफ हमारी सरकार की तकलीफ है, आप लोगों को किसी भी चीज की कमी नहीं होने दी जाएगी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के दौरे के दौरान भी वन मंत्री केदार कश्यप पूरे समय उनके साथ रहे। उन्होंने श्री साय को आपदा की विभीषिका के बारे में मुख्यमंत्री को सिलसिलेवार जानकारी भी दी। उल्लेखनीय है कि कुछ दिनों पहले ही मंत्री केदार कश्यप के जवान भतीजे का एक दुर्घटना में निधन हो गया था। परिवार में अभी भी मातमी माहौल है। बावजूद अपना गम भुलाकर मंत्री केदार कश्यप उन पीड़ितों की मदद के लिए निकल पड़े हैं, जिन्हें वे अपने परिवार का ही हिस्सा मानते हैं। श्री कश्यप की इस सदाशयता और जनता के प्रति समर्पण भावना के लोग कायल हो गए हैं।









