पितृ पक्ष हिंदू धर्म में पूर्वजों को स्मरण करने और उनकी आत्मा की शांति के लिए विशेष काल माना जाता है। मान्यता है कि इस दौरान किए गए श्राद्ध, तर्पण और दान-पुण्य से पितर प्रसन्न होकर अपने वंशजों को सुख-समृद्धि और आरोग्य का आशीर्वाद देते हैं।
पितृ पक्ष 2025 की तिथियां
आरंभ: 6 सितंबर 2025, शनिवार (प्रतिपदा/महालय श्राद्ध)
समापन: 17 सितंबर 2025, बुधवार (सर्वपितृ अमावस्या)
पितृ पक्ष से जुड़ी खास बातें
1. पहला दिन – महालय श्राद्ध
पितृ पक्ष की शुरुआत महालय से होती है। जिन पूर्वजों की पुण्यतिथि ज्ञात नहीं होती, उनका श्राद्ध इस दिन किया जाता है। यही वह दिन है जब पितरों के आगमन की मान्यता है।
2. अंतिम दिन – सर्वपितृ अमावस्या
यह सबसे महत्वपूर्ण दिन होता है। जिन परिवारों को अपने पितरों की सही तिथि ज्ञात न हो, वे इस दिन श्राद्ध और तर्पण करते हैं। इसे सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या भी कहा जाता है।
3. तर्पण की दिशा
तर्पण करते समय दक्षिण दिशा की ओर मुख करना चाहिए, क्योंकि इसे पितरों की दिशा माना गया है।
4. आवश्यक सामग्री
तर्पण में कुशा, काला तिल, दूध और शुद्ध जल का प्रयोग अनिवार्य माना जाता है।
5. मंत्रोच्चार
‘ॐ पितृभ्यः स्वधा’ मंत्र का उच्चारण करते हुए जल अर्पित करना शुभ और फलदायी माना जाता है।
6. श्राद्ध काल में निषेध
इस दौरान मांस, मदिरा, प्याज और लहसुन का सेवन वर्जित है।
7. सदाचार और आचरण
पितृ पक्ष में झगड़ा, क्रोध, कटु वचन और दूसरों का अपमान करने से बचना चाहिए।
8. दान और ब्राह्मण भोजन
श्राद्ध के बाद ब्राह्मण को भोजन कराना और यथाशक्ति दान देना पितरों की तृप्ति और वंशजों के लिए कल्याणकारी होता है।









