अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा कदम उठाते हुए जापान से आयात होने वाली गाड़ियों और अन्य उत्पादों पर टैरिफ कम कर दिया है। पहले यह दर 27.5% थी, जिसे घटाकर अब 15% कर दिया गया है। यह फैसला जुलाई 2025 में हुई अमेरिका-जापान व्यापार वार्ता का नतीजा है। ट्रंप ने इसे दोनों देशों के बीच “नए आर्थिक युग” की शुरुआत बताया।
जापान को राहत, अमेरिका को निवेश
इस समझौते से जापान की ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री को बड़ी राहत मिलेगी। अब जापानी कंपनियों को अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धा करना आसान होगा। वहीं, जापान ने अमेरिका में 550 अरब डॉलर निवेश करने का वादा किया है। इसमें इक्विटी, लोन और सरकारी गारंटी शामिल होंगे।
कंपनियों और उद्योगों की प्रतिक्रिया
जापान की प्रमुख कंपनी टोयोटा ने इस कदम का स्वागत किया। कंपनी का कहना है कि टैरिफ घटने से व्यापारिक अनिश्चितता खत्म होगी और अमेरिकी बाजार में स्थिरता आएगी। गौरतलब है कि पहले लगे ऊंचे टैरिफ के कारण जापानी कंपनियों को अरबों डॉलर का नुकसान झेलना पड़ा था।
कृषि और रक्षा सौदे भी शामिल
जापान ने अमेरिका से चावल की खरीद 75% बढ़ाने का वादा किया है।
इसके अलावा, जापान सालाना 8 अरब डॉलर के कृषि उत्पाद (मक्का, सोयाबीन, खाद और बायोएथनॉल) खरीदेगा।
रक्षा क्षेत्र में भी समझौता हुआ है, जिसके तहत जापान 100 बोइंग विमान खरीदेगा और अमेरिका के साथ अपना वार्षिक रक्षा खर्च 14 अरब डॉलर से बढ़ाकर 17 अरब डॉलर करेगा।
व्यापार संतुलन पर असर
साल 2024 में अमेरिका और जापान का व्यापार लगभग 230 अरब डॉलर रहा था, जिसमें जापान को 70 अरब डॉलर का अधिशेष मिला। नए समझौते से उम्मीद है कि यह अंतर कुछ हद तक संतुलित होगा। साथ ही, चिप्स, दवाइयों और हवाई जहाज से जुड़ी तकनीकों पर जापान को कम या शून्य टैरिफ का लाभ मिलेगा।









