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ग्राम पंचायत उमरेली में मवेशियों की दुर्दशा — प्रशासन की अनदेखी और जिम्मेदारों की लापरवाही

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(जांजगीर चांपा- संवाददाता राजेन्द्र जयसवाल)
 जिला कोरबा, करतला ब्लॉक के ग्राम पंचायत उमरेली से एक हृदयविदारक तस्वीर सामने आई है। यहां पंचायत के मुक्ति धाम परिसर में करीब सैकड़ों गायों को बिना पानी और चारे के छोड़ दिया गया। कई दिनों से यह हालात बने हुए हैं, जिससे इन बेजुबान पशुओं की हालत दयनीय हो गई है।
सरपंच-सचिव की लापरवाही उजागर
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायत उमरेली के सरपंच और सचिव की देखरेख में ही इन गायों को इस तरह असहाय छोड़ दिया गया है। यह स्थिति पशु क्रूरता अधिनियम और पंचायत के कर्तव्यों का खुला उल्लंघन है। पंचायत का यह दायित्व होता है कि गांव में छोड़े गए बेसहारा मवेशियों के लिए कम से कम पानी और चारे की व्यवस्था की जाए, लेकिन यहां जिम्मेदारों ने अपने कर्तव्य से मुंह मोड़ लिया है।
बेजुबानों पर अत्याचार
गायें भारतीय संस्कृति में गौमाता के रूप में पूजनीय मानी जाती हैं। लेकिन उमरेली की तस्वीरें और हालात देखकर लगता है कि बेजुबानों के प्रति संवेदनशीलता पूरी तरह गायब हो चुकी है। गर्मी और बारिश के बीच पानी व चारे के बिना इन मवेशियों की स्थिति लगातार बिगड़ रही है। कई गायों की जान जाने का भी खतरा मंडरा रहा है।
प्रशासन की भूमिका पर सवाल
यह मामला केवल पंचायत तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रशासन की जिम्मेदारी भी बनती है कि ऐसी घटनाओं पर तुरंत संज्ञान ले। ग्रामीणों की शिकायतों के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे सवाल उठता है कि क्या प्रशासन भी जानबूझकर आंख मूंदे बैठा है?
ग्रामीणों की मांग
तत्काल सभी मवेशियों के लिए पानी और चारे की व्यवस्था की जाए।
जिम्मेदार सरपंच और सचिव के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए।
पंचायत स्तर पर पशु संरक्षण और देखरेख की स्थायी व्यवस्था बनाई जाए।
ऐसे मामलों की नियमित निगरानी के लिए एक विशेष समिति गठित की जाए।
ग्राम पंचायत उमरेली की यह घटना केवल एक गांव की समस्या नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की असंवेदनशीलता को दर्शाती है।
ग्राम पंचायत उमरेली की यह घटना केवल एक गांव की समस्या नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की असंवेदनशीलता को दर्शाती है। जिन गायों को गांव की आस्था और संस्कृति में उच्च स्थान प्राप्त है, वही आज पंचायत और प्रशासन की लापरवाही की भेंट चढ़ रही हैं। यदि समय रहते कठोर कदम नहीं उठाए गए तो यह केवल पशु क्रूरता नहीं, बल्कि समाज और प्रशासन की संवेदनहीनता का भी बड़ा उदाहरण बन जाएगा।

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