जांजगीर चांपा संवाददाता – राजेन्द्र प्रसाद जायसवाल
जिला जांजगीर-चांपा, विकासखंड बम्हनीडीह | शिक्षा ही बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की कुंजी है। लेकिन ग्रामीण अंचलों में ऐसे अनेक बच्चे हैं, जिन्हें पारिवारिक परिस्थितियों, संसाधनों की कमी और माता-पिता की व्यस्तता के कारण नियमित अध्ययन में कठिनाई होती है। इन्हीं बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने और शिक्षा में पिछड़ने से रोकने के लिए शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला सेमरिया ने एक अनूठी पहल की है।
विद्यालय के प्रभारी प्रधान पाठक उमेश कुमार दुबे ने “नई सोच–नई पहल” के तहत 09 सितंबर 2025 को मां सरस्वती पूजन के पश्चात सुबह 8:30 से 9:30 बजे तक कमजोर छात्र-छात्राओं के लिए विशेष अतिरिक्त कक्षा की शुरुआत की। इस अतिरिक्त घंटे में बच्चों को पढ़ने, लिखने, बोलने और समझने में होने वाली कठिनाइयों को दूर करने के लिए विशेष अभ्यास कराया जा रहा है, ताकि वे अपने साथियों के बराबर खड़े हो सकें।

पहल का उद्देश्य
उमेश कुमार दुबे का कहना है कि गाँव के कई पालक खेती-किसानी और दिहाड़ी कार्यों में व्यस्त रहते हैं। कई परिवार रोज़गार की तलाश में बाहर चले जाते हैं, जिससे बच्चों को घर में पढ़ाई का वातावरण नहीं मिल पाता। इसी कारण बच्चों की शिक्षा प्रभावित होती है। इस समस्या को ध्यान में रखते हुए विद्यालय ने तय किया है कि ऐसे बच्चों को प्रतिदिन एक घंटे का अतिरिक्त समय देकर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जाएगी। यह प्रयास तब तक जारी रहेगा, जब तक छात्र-छात्राएँ फुर्ती से पढ़ने-लिखने में सक्षम नहीं हो जाते।
बच्चों को प्रोत्साहन
विशेष कक्षा में उपस्थित बच्चों को विद्यालय द्वारा कापी और पेन भी प्रदान किए गए, ताकि वे अभ्यास में पीछे न रहें और नियमित रूप से लेखन व पठन का अभ्यास कर सकें।
आज की कक्षा में उपस्थित छात्र-छात्राएँ
लखेश्वर जांगड़े, नंदनी जोशी, पूजा कश्यप, वंदना, रुखसाना बी, रचना केवट, खुशी कश्यप, विशाल रात्रे, साहिल कश्यप, नीतीक कश्यप, सोनाक्षी कश्यप, आलिया शेख, जागृति भारद्वाज और राकेश कश्यप।
शिक्षा सुधार की मिसाल
सेमरिया विद्यालय की यह पहल शिक्षा के क्षेत्र में एक सकारात्मक प्रयोग है। कमजोर बच्चों को अतिरिक्त समय देकर उन्हें न केवल पढ़ने-लिखने में दक्ष बनाया जा रहा है, बल्कि उनके आत्मविश्वास को भी बढ़ाया जा रहा है। यह कदम उन बच्चों के लिए प्रेरणास्रोत है, जो परिस्थितियों के कारण शिक्षा में पीछे रह जाते हैं।
यदि इस प्रकार की पहल अन्य विद्यालय भी अपनाएँ, तो निश्चित रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की गुणवत्ता में बड़ा सुधार होगा और कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित नहीं रहेगा।









