Home चर्चा में असंभव को संभव बनाने वाली जांजगीर-चांपा पुलिस की सूझबूझ और समर्पण

असंभव को संभव बनाने वाली जांजगीर-चांपा पुलिस की सूझबूझ और समर्पण

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जांजगीर चांपा- संवाददाता राजेन्द्र जयसवाल
जिला जांजगीर-चांपा।
दिनांक 06 सितम्बर 2025 की रात्रि को ग्राम करही के उपसरपंच महेंद्र बघेल के लापता होने की खबर ने पूरे जिले को चिंता और दहशत से भर दिया था। प्रारंभिक जाँच में ही मामला संदिग्ध प्रतीत होने लगा। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए न केवल आरोपियों को गिरफ्तार किया बल्कि पूछताछ में सामने आए सच ने सबको स्तब्ध कर दिया कि हत्या के बाद शव को महानदी के तेज बहाव में फेंक दिया गया है।
उफनती नदी में चुनौतीपूर्ण खोज
बरसात के मौसम में उफनती महानदी से शव की तलाश किसी असंभव कार्य से कम नहीं थी। लेकिन जांजगीर-चांपा पुलिस ने हार मानने के बजाय अपने साहस और रणनीति का परिचय दिया।
पुलिस अधीक्षक व अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में उप पुलिस अधीक्षक (आजाक), थाना बिर्रा, शिवरीनारायण, बहमनीडीह, कोतवाली सहित कई थानों की संयुक्त टीम, पुलिस लाइन रक्षित केंद्र, नगर सेना के गोताखोर, फॉरेंसिक टीम तथा ड्रोन कैमरे की मदद से सघन तलाशी अभियान चलाया गया।
लगातार 30 से 35 किलोमीटर तक नदी क्षेत्र की खोजबीन, ग्रामीणों के सहयोग से समन्वय, और आक्रोशित ग्रामीणों के बीच कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं था।
टीमवर्क और धैर्य का नतीजा
लगातार प्रयासों के बाद पुलिस टीम महेंद्र बघेल का शव नदी के बीच बने टापू से बरामद करने में सफल हुई। इसके बाद विधिक प्रक्रिया पूर्ण कर शव परिजनों को सौंपा गया और शांतिपूर्वक अंतिम संस्कार सम्पन्न हुआ।
संवेदनशीलता और कर्तव्यनिष्ठा का उदाहरण
इस कठिन कार्रवाई के दौरान पुलिस ने केवल अपराधियों की गिरफ्तारी और साक्ष्य जुटाने का काम ही नहीं किया, बल्कि आक्रोशित ग्रामीणों को धैर्यपूर्वक संभालते हुए जनता का विश्वास भी पुनः अर्जित किया। यह केवल कानून-व्यवस्था की सफलता नहीं, बल्कि पुलिस की संवेदनशीलता और कर्तव्यनिष्ठा का अद्भुत संगम था।
गर्व का विषय
जांजगीर-चांपा पुलिस ने यह साबित कर दिया कि यदि टीमवर्क, साहस और जनता के प्रति जिम्मेदारी का भाव साथ हो, तो असंभव कार्य भी संभव हो जाता है। इस मिशन में शामिल सभी अधिकारी व कर्मचारी जिले के लिए गर्व का विषय हैं।
प्रशस्ति पत्र और सम्मान की आवश्यकता
पुलिस बल का मनोबल तभी और ऊँचा होता है जब उनके साहस और समर्पण को सम्मान मिले। अतः यह आवश्यक है कि इस अभियान में शामिल पुलिस अधिकारी, उप निरीक्षक, आरक्षक और सहयोगी बल को पुलिस अधीक्षक द्वारा तत्काल प्रभाव से ईनाम एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया जाए। इससे न केवल उनका उत्साहवर्धन होगा, बल्कि आने वाले समय में भी पुलिसकर्मी और अधिक समर्पण से जनता की सेवा में जुटे रहेंगे।

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