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अब सचमुच नाचने, झूमने लगा है हमारा बस्तर

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बस्तर संवाददाता- अर्जुन झा 
= मोदी के संकल्प और साय के सुशासन ने खोल दिए सुख समृद्धि के द्वार =
= गायब हो रहा है लाल आतंक का काला साया =

जगदलपुर। टुकनी धर के आबे गोरी तैं मौहा बीने ला, में हा आहूं तोर ले मिले बर, दुनो नाच लेबो, झूम लेबो, गाबो बस्तरिहा गाना..। प्रसिद्ध लोक गायक हिरेश सिन्हा और जीतेश्वरी सिन्हा द्वारा गाया गया यह गीत सिर्फ बस्तर और छत्तीसगढ़ में ही नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, ओड़िशा, झारखंड, राजस्थान समेत अन्य राज्यों में भी काफी लोकप्रिय हुआ है। इस गीत पर लाखों रील्स बन चुकी हैं और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां हो चुकी हैं और लगातार हो रही हैं। बस्तर अब सचमुच नाचने- झूमने लगा है, बस्तरिहा गाना चारों ओर गूंज रहा है, बस्तर के आंगन में उमंग, उल्लास और खुशहाली का माहौल है, विकास की किरणें प्रस्फुटित हो चुकी हैं।
बस्तर के लोग विकास और लोकतंत्र की मुख्यधारा से जुड़ चुके हैं, नक्सलियों की दिखावटी हमदर्दी को वे भांप चुके हैं। केंद्र और छत्तीसगढ़ की सरकारों द्वारा बस्तर के विकास के लिए सारे दरवाजे खोल दिए गए हैं। केंद्र सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति और छत्तीसगढ़ की विष्णु देव साय सरकार के सुशासन के बीच पुलिस और सुरक्षा बलों के जवान नक्सल आतंक के खात्मे के लिए प्रतिबद्ध होकर काम कर रहे हैं। नक्सलियों का लगातार संहार तो हो ही रहा है, सक्रिय नक्सली, उनकी स्लीपर सेल से जुड़े मैदानी वर्कर बड़ी संख्या में आत्मसमर्पण भी कर रहे हैं। हमारी फोर्स neनक्सलियों को आर्थिक, सामरिक और मानसिक रूप से इस कदर पंगु बना दिया है कि वे घिसटने के लिए मजबूर हो गए हैं। इसी के साथ नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ सरीखे पहुंच विहीन इलाके के साथ ही दंतेवाड़ा, बीजापुर, सुकमा, कांकेर व कोंडागांव जिलों के धुर नक्सल प्रभावित गांवों में भी पक्की सड़कें, पुल पुलिया, स्वस्थ्य केंद्र, स्कूल, बिजली, पेयजल मोबाईल फोन कनेक्टीविटी जैसी सुविधाएं पहुंच चुकी हैं। ऐसे में बस्तर का नाचना झूमना स्वाभाविक है।

मंत्री केदार कश्यप का बड़ा योगदान
बस्तर संभाग में नए सूरज का उदय यूं ही नहीं हो गया है। इसके पीछे राज्य और बस्तर के जनप्रतिनिधियों के भी योगदान को नकारा नहीं जा सकता। खासकर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, उप मुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा और बस्तर संभाग के निवासी वन मंत्री केदार कश्यप की इसमें बड़ी भूमिका है। सरकार और गृह मंत्रालय ने बस्तरवासियों के हित में काफी काम किया है। वहीं बचपन से नक्सल आतंक का खूनी खेल देखते आए युवा आदिवासी नेता एवं वन मंत्री केदार कश्यप अपने विभागों से जुड़ी योजनाओं को बस्तर के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए प्रण प्राण से काम करते आ रहे हैं। केदार कश्यप संभाग के सुदूर गांवों में जाकर लगातार आदिवासियों से जीवंत संपर्क बनाए रखते हैं। बस्तर के आदिवासियों और दूसरे समुदायों के लोगों को नक्सल विचारधारा से मुक्त कराने और लोकतंत्र एवं समाज व विकास की मुख्यधारा से जोड़ने में मंत्री केदार कश्यप की सबसे बड़ी भूमिका है।

ये है उदीयमान बस्तर
आज जगदलपुर शहर की सड़क से जो तस्वीर सामने आई है, वह उदीयमान बस्तर की सच्चाई बयां कर रही है। हमने खबर की शुरुआत बस्तर की सबसे बड़ी पहचान महुआ (मौहा) से की थी। महुआ और प्रेम प्रसंग पर आधारित गीत झूम लेबो, नाच लेबो न गाबो बस्तरिहा गाना से चार कदम आगे बढ़ते हुए बस्तर अब रास गरबा, डांडिया, भांगड़ा तक पहुंच गया है। बस्तर में अब शांति और खुशहाली लौट आई है। युवा वर्ग अपनी पढ़ाई के साथ साथ उन्मुक्त होकर अपनी खुशियां शहर में बिखेर रहा है। आज सुबह ही एक युवती ने अपने सहयोगी कैमरामैन के साथ दुर्गा पूजा उत्सव पर गरबा नृत्य हेतु रील बनाई। इंस्टाग्राम और फेसबुक पेज पर शेयर करने के उद्देश्य से रील की शूटिंग की गई। नाम उजागर न करने की शर्त पर युवती ने कहा कि हम बस्तर के युवा अब पढ़ाई के साथ साथ अपनी कला का प्रदर्शन कर धन और शोहरत कमाना चाहते हैं। घाघरा चोली के साथ श्रृंगारित यह नृत्य बदलते बस्तर, सुंदर बस्तर और सुरक्षित बस्तर की बानगी पेश करता नजर आया।

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