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प्रदेश के कॉलेजों में उठ रहे सवाल छात्र संघ चुनाव पर सरकार जल्द करे चुनाव की तिथि घोषित : अहसन मेमन

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गरियाबंद –

छत्तीसगढ़ NSUI के प्रदेश सचिव अहसन मेमन ने कहा कि छत्तीसगढ़ में छात्र संघ चुनाव बंद हुए अब लगभग नौ साल हो चुके है । वर्ष 2017 से अब तक प्रदेश की किसी भी यूनिवर्सिटी या कॉलेज में चुनाव नहीं कराए गए है । इस मुद्दे पर सवाल उठाते हुए प्रदेश सचिव अहसन मेमन ने कहा कि यह स्थिति न केवल छात्रो के अधिकारो का हनन है बल्कि लोकतांत्रिक परंपराओं पर भी सीधी चोट है ।

मेमन ने कहा कि छात्र राजनीति हमेशा से लोकतंत्र की नर्सरी रही है । प्रदेश नहीं बल्कि पूरे देश को कई कद्दवार नेता छात्र राजनीति से ही मिले है । लेकिन पिछले कई वर्षों से चुनाव न होने से युवाओं के नेतृत्व निर्माण की प्रऋिया ठप पढ़ गई है ।

गौरतलब है कि 23 अगस्त 2017 को राज्य सरकार ने लिंगदोह समिति की सिफारिशों और कुलपतियों की चिंताओं को आधार बनाकर छात्र संघ चुनाव पर रोक लगा दी थी तथा मनोनयन पद्धति लागू की गई थी । लेकिन इन नौ वर्षों में यह साफ़ हो गया है कि बिना चुनाव छात्र संगठनों की भूमिका कमजोर हो गई है और अपारदर्शीता का माहौल बढ़ा है । अहसन मेमन का कहना है कि यह विडंबना है कि समय पर विधानसभा, लोकसभा और निकाय चुनाव कराए जाते है, मगर छात्रो को अपने प्रतिनिधि चुनने का अवसर नहीं दिया जाता । उन्होंने कहा कि क्या सरकार युवाओ की आवाज को दबाना चाहती है ? यदि लोकतंत्र की बुनियाद को मजबूत करना है तो छात्र राजनीति को फिर से सक्रिय करना होगा । उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि न तो NSUI और न ही ABVP जैसे संगठन चुनाव न होने से नाराज़ है दोनों संगठन लगातार ज्ञापन सौप रहे है । आंदोलन कर रहे है और चुनाव की मांग उठा रहे है । इसके बावजूद सरकार और प्रशासन की ओर से कोई ठोस पहल सामने नहीं आई है ।

अहसन मेमन ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र ही छात्र संघ चुनाव की तिथि घोषित नहीं की गई तो प्रदेशभर के छात्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे । उन्होंने कहा कि छात्र संघ चुनाव लोकतांत्रित अधिकार है। इसे रोककर सरकार युवाओ का भविष्य रोक रही हैं ।प्रदेशभर की विश्वविद्यालयी राजनीति ने कई बड़े नेता दिय है, लेकिन पिछले नौ वर्षों से यह परम्परा ठप है । सरकार को तत्काल चुनाव घोषणा करनी होगी , वरना यह छात्रो के साथ विश्वासघात माना जाएगा । अब देखना यह होगा कि लगातार उठ रहे सवालों और आरोप – प्रत्यारोप के बीच सरकार कब तक चुप्पी साधे रहती है और क्या वास्तव में वह छात्र राजनीति को पुनर्जीवित करने के दिशा में जवाबदेही तय कर ठोस कदम उठाती है ।

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