गुरु नानक देव जी का ज्योति जोत दिवस सिख धर्म के पहले गुरु की परम ज्योति में लीन होने की स्मृति में मनाया जाता है। यह दिन न केवल उनकी शारीरिक विदाई का प्रतीक है, बल्कि उनके द्वारा बताए गए आध्यात्मिक मार्ग और सच्चे जीवन मूल्यों की अमरता का प्रतीक भी है।
गुरु नानक देव जी ने अपने जीवन में एक ईश्वर की उपासना, समानता, सेवा, ईमानदारी और करुणा जैसे सिद्धांतों का प्रचार किया। उन्होंने जात-पात, भेदभाव और अंधविश्वास के खिलाफ आवाज उठाई और समाज में एकता और मानवता का संदेश फैलाया।
उनकी शिक्षाएं आज भी गुरबाणी के रूप में सिख धर्म के पवित्र ग्रंथ श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी में जीवित हैं। उनका जीवन हमें सिखाता है कि धर्म केवल पूजा नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक सच्ची राह है।
इस दिन को कैसे मनाया जाता है:
– गुरुद्वारों में कीर्तन, पाठ, और सेवा होती है।
– लंगर (निशुल्क भोजन) का आयोजन होता है जहाँ जाति-पाति भुलाकर सभी एक साथ भोजन करते हैं।
– श्रद्धालु गुरु जी की शिक्षाओं को आत्मसात करने का संकल्प लेते हैं।
गुरु नानक देव जी का जोत दिवस हमें याद दिलाता है कि उनकी दी हुई रौशनी आज भी हमारे जीवन को मार्गदर्शित कर रही है। आइए, इस पावन अवसर पर हम उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लें और प्रेम, सेवा और सच्चाई को जीवन में उतारें।









