एमसीबी संवाददाता – हनुमान प्रसाद यादव
एमसीबी: भरतपुर एकीकृत बाल विकास विभाग के परियोजना कार्यालय भवन जर्जर हो गया था, जर्जर भवन की जीर्णोद्धार कराने के लिए मिली थी 9 लाख की स्वीकृति, जीर्णोद्धार के नाम पर ठेकेदार द्वारा राशि का खाना पूर्ति कर पैसों का किया गया बंदरबांट, जबकि विभाग के नाक तले यह मरम्मत कार्य कराया गया, जो निम्न स्तर है। जिसे मानक मापदंडों के आधार पर नहीं कराया गया है। विभागीय लापरवाही या फिर उनके संरक्षण से ठेकेदार मोटी रकम बचाने के चक्कर में कराया गया घटिया कार्य। जिस कारण आज भी भवन खंडार में तब्दील है। लोक निर्माण विभाग की यह सबसे बड़ी भ्रष्टाचार, विकास के नाम पर किया गया खिलवाड़, बिल्डिंग के अभाव में एक कमरे में कार्यालय का संचालन करने को मजबूर,

नगर पंचायत जनकपुर उपाध्यक्ष निलेश मिश्रा द्वारा, उक्त परियोजना कार्यालय की ,मरम्मत कार्य का निरीक्षण के दौरान, लोक निर्माण विभाग के एसडीओ से की बात, एसडीओ ने भी कार्य को बताया निम्न स्तर, लोक निर्माण विभाग के एसडीओ पर भी सवाल जब कार्य प्रगति पर था, तब आपने क्या किया। शासन प्रशासन जिम्मेदारों के संरक्षण से घटिया निर्माण कार्यों की जांच कराई जाए, जांच के दौरान गलत पाए जाने पर, ऐसे जिम्मेदारों पर शासन के नियमानुसार प्रशासनिक कार्यवाही होनी चाहिए। जिन्हें अपने पदीय दायित्व का मतलब ही ना हो, और भ्रष्टाचार में संलिप्प्ट हो। क्या इस प्रकार के घटिया कार्य कराने वाले ठेकेदार या सब इंजीनियर पर होगी कार्रवाई, या फिर खाना पूर्ति सिर्फ कागजों पर ही सीमित रहेगा। अब देखना यह है कि प्रशासन व विभाग के द्वारा इनपर क्या कार्रवाई की जाती है।









