दक्षिण एशिया की भू-राजनीतिक परिदृश्य में एक नया बदलाव दिखाई दे रहा है। पाकिस्तान, जो लंबे समय से चीन की छत्रछाया में रहा है और बीजिंग के साथ करीबी आर्थिक और सैन्य संबंध बनाए रखा है, अब अमेरिका और तुर्की के साथ अपनी साझेदारियों को नई गति दे रहा है। यह बदलाव इस्लामाबाद की विदेश नीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ है। इससे न केवल पाकिस्तान की रणनीतिक स्वतंंत्रता बढ़ सकती है, बल्कि यह भारत के सुरक्षा ढांचे, व्यापारिक हितों और क्षेत्रीय प्रभाव के लिए सीधे तौर पर चुनौती पेश कर सकता है।
पाकिस्तान और अमेरिका के बीच बढ़ती कूटनीतिक और सैन्य बातचीत, साथ ही तुर्की के साथ सहयोग, भारत के लिए नए सुरक्षा और कूटनीतिक परिदृश्य खड़े कर रहे हैं। इसके तहत भारत को अपनी क्षेत्रीय रणनीति, सीमा सुरक्षा और आर्थिक साझेदारियों पर पुनर्विचार करना पड़ सकता है।
पाकिस्तान, आर्थिक संकट और राजनीतिक अस्थिरता के बीच, अब अमेरिका और तुर्की को रणनीतिक रूप से अहम प्रस्ताव पेश कर रहा है। इसमें सबसे बड़ा कदम अरब सागर के किनारे स्थित पसनी बंदरगाह को अमेरिका के लिए खोलने का प्रस्ताव है। यह बंदरगाह चीन के ग्वादर बंदरगाह से मात्र 100 किलोमीटर दूर स्थित है, जो इसे रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण बनाता है।









