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दागी अधिकारी पर कलेक्टर मेहरबान

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बस्तर संवाददाता – अर्जुन झा

प्रशासन के खिलाफ बसपा ने खोला मोर्चा 
 100 करोड़ के भ्रष्टाचार का आरोप है अफसर पर 
 बलरामपुर के लिए रिलीव नहीं कर रहे हैं कलेक्टर 

जगदलपुर। बस्तर संभाग के सुकमा जिले के कोंटा विकासखंड के पूर्व जनपद सीईओ एवं वर्तमान में सुकमा में पदस्थ सहायक संचालक जिला व्यापार एवं उद्योग विभाग के दागी अधिकारी को सुकमा से भारमुक्त का करने बहुजन समाज पार्टी के जिला अध्यक्ष सोलेमन गांडा ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है। सोलेमन गांडा ने मांग की है कि दागी अधिकारी जिस पर 100 करोड़ के भ्रष्टाचार मामले की शिकायत केंद्रीय सचिव से की जा चुकी है। ऐसी अधिकारी पर प्रशासन क्यों मेहरबान है? दागी अधिकारी को भारमुक्त नहीं करने पर कलेक्टर घेराव की चेतावनी दी गई है। इसकी प्रतिलिपि विभागीय मंत्री से छग शासन के प्रमुख सचिव को भी भेजी गई है।

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ज्ञातव्य हो कि सुकमा जिले के कोंटा विकासखंड के पूर्व सीईओ जिन्हें वर्ष 2021-2023 तक प्रभारी सीईओ की जिम्मेदारी दी गई थी। इस अवधि में उन पर अमृत सरोवर, रीपा योजना, मनरेगा सहित अन्य योजनाओं में महज कागजों में कार्य दिखाकर करोड़ों की राशि की बंदरबांट करने के गंभीर आरोप लगे हैं।शिकायतकर्ता द्वारा 100 करोड़ से अधिक के भ्रष्टाचार किए जाने की शिकायत केन्द्रीय सचिव से की गई है। इस दागी अधिकारी को वर्तमान में उद्योग विभाग के सहायक संचालक की जिम्मेदारी सौंप दी गई है।

कलेक्ट्रेट घेरावी की चेतावनी
बहुजन समाज पार्टी के जिला अध्यक्ष सोलेमन ने कहा है कि उक्त अधिकारी के जिले में रहते हुए उन पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप की निष्पक्ष जांच संभव नहीं है। उन्होंने कलेक्टर सुकमा को पत्र लिखकर उन्हें सुकमा जिले से बाहर करने की मांग की है। एक हफ्ते में इस अधिकारी को भारमुक्त नहीं किए जाने पर कलेक्टर कार्यालय के घेराव की चेतावनी दी गई है। दागी अधिकारी का तबादला बलरामपुर के लिए हो चुका है। कलेक्टर की मेहरबानी से 4 माह बाद भी उन्हें भारमुक्त नहीं किया गया है।

संगठन पर अफसर भारी
जानकारी के अनुसार उक्त दागी अधिकारी के खिलाफ सत्तारुढ़ भाजपा के प्रदेश संगठन के एक नेता द्वारा उद्योग मंत्री को पत्र लिखकर हटाने की मांग की गई थी। जिसके बाद विभागीय मंत्री के आदेश पर इस अधिकारी को सुकमा से हटाकर बलरामपुर भेजा गया था। जिला प्रशासन अधिकारी पर इस कदर मेहरबान है कि उक्त अधिकारी को चार माह बाद भी भारमुक्त नहीं किया गया है। जिसको लेकर चर्चा है कि संगठन पर जिला प्रशासन भारी है।

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