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वन विभाग की लापरवाही से जंगल सुरक्षित नहीं, शिकायत के बावजूद नहीं लगा अंकुश, ग्रामीणों ने अतिक्रमण पर रोक लगाने की रखी थी मांग

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मनेन्द्रगढ़ संवाददाता – हनुमान प्रसाद यादव
छत्तीसगढ़ वन विभाग का मामला, जंगल पर चल रहे अवैध वन भूमि अतिक्रमण रोकने में नाकाम: सरकार जहां वन सुरक्षा के लिए करोड़ों की लागत  हर वर्ष खर्च कर रही है, वही वन विभाग वन संपदा को सुरक्षित रखने के वजय अनदेखी करने मे कोई कसर नहीं छोड़ती है वहीं जमीनी स्तर पर इसका हल बिल्कुल उल्टा नजर आ रहा है।पर्यावरण  हेतु वनों में वृक्षारोपण का कार्य हर वर्ष कराया जाता है, जंगल की सुरक्षा व्यवस्था में कोई कसर नहीं छोड़ती, परंतु जंगल सुरक्षित नहीं है।  अधिकांश जगहों पर  कार्य तो कराया जाता है परंतु सुरक्षा व रखरखाव में रक्षक ही बन जाते हैं भक्षक, जिससे वन संपदा व जंगल सुरक्षित नहीं है। वन विभाग में जितने भी कार्य कराए गए हैं, यदि  स्थल निरीक्षण कराया जाए तो वास्तविकता का पता चल जाएगा।
कोरिया वन मंडल  अंतर्गत वन परिक्षेत्र कोटाडोल के अश्रित ग्राम भूमका के  वन सुरक्षा समिति अध्यक्ष सहित काफी संख्या में ग्रामीणों ने लिखित आवेदन पत्र के माध्यम से  जंगल में अवैध अतिक्रमण रोक लगाने की रखी थी मांग, जहाँ बीट भूमका के कक्ष क्रमांक RF 28  में बांस  प्लांटेशन लगाया गया था,।वहीं अब सुरक्षा के अभाव में  प्लांटेशन के अंदर पेड़ों की  कटाई तथा अवैध अतिक्रमण किया जा रहा है, जंगल में हो रहे अतिक्रमण पर रोक लगाने हेतु  ग्रामीणों ने वन परिक्षेत्र अधिकारी को कई बार आवेदन दिया जा चुका है परंतु अभी तक, ना तो जांच की गई ,ना ही कोई कार्यवाही, जिससे वनों की कटाई और अवैध अतिक्रमण   लगातार आज भी जारी है। ग्रामीणों ने लगाया वन विभाग पर मिली भगत होने  का आरोप, विभागीय संरक्षण से अवैध अतिक्रमण किया जा रहा है, जिससे  शिकायत के बावजूद , वन विभाग कार्यवाही करने में कतरा रही है। जिसकी सूचना जनदर्शन में भी दिया जा चुका है परंतु कोई असर नहीं देखने को मिला,  नाही  अब तक  कोई जांच,न कार्यवाही की गई। जिससे ग्रामीणों को मीडिया का सहारा लेना पड़ा। अब देखना यह है कि प्रशासनिक अमला जंगल में हो रही अतिक्रमण पर कोई कार्रवाई कर रही है या फिर इसी तरह से जंगल की कटाई और अवैध वन भूमि पर अतिक्रमण का जारी रहेगा।

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