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युवा पीढ़ी को कर्म क्षेत्र में सफलता के लिए भक्तिकालीन साहित्य से प्रेरणा लेने की आवश्यकता : डॉ. फूलदास महंत

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जांजगीर-चांपा  संवाददाता – राजेंद्र प्रसाद जायसवाल
 जिला जांजगीर-चांपा
नवागढ़, 13 अक्टूबर 2025।
राधाकृष्ण शिक्षण समिति एवं पंडित जवाहरलाल नेहरू महाविद्यालय, नवागढ़ के स्नातकोत्तर हिंदी विभाग द्वारा “हिंदी साहित्य और भक्तिकाल के कवि” विषय पर एक अतिथि व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस व्याख्यान में मुख्य वक्ता के रूप में नवीन शासकीय महाविद्यालय सकरी के प्राध्यापक डॉ. फूलदास महंत उपस्थित थे, जिन्होंने अपने प्रेरक उद्बोधन से छात्र-छात्राओं को जीवन दर्शन और कर्म मार्ग के प्रति जागरूक किया।
कार्यक्रम की शुरुआत माँ सरस्वती की वंदना से हुई। स्वागत भाषण संस्था के संचालक डॉ. विनोद अग्रवाल एवं संचालिका डॉ. अन्नपूर्णा अग्रवाल ने संयुक्त रूप से दिया। उन्होंने भक्तिकालीन साहित्य में सूरदास के योगदान पर प्रकाश डालते हुए बताया कि सूर साहित्य आज भी समाज को संवेदना, भक्ति और प्रेम का सशक्त संदेश देता है।
डॉ. फूलदास महंत ने अपने संबोधन में कहा कि—
> “साहित्य का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि मानवता और समाज कल्याण के लिए मार्गदर्शन देना है। भक्तिकाल के कवियों — कबीर, जायसी, सूरदास और तुलसीदास — ने अपने सृजन के माध्यम से समाज में प्रेम, शांति और एकता का संदेश दिया। उस युग में जब समाज में भ्रम, अंधकार और धार्मिक अस्थिरता थी, तब भक्ति कवियों ने जनता को अध्यात्म और मानवता की राह दिखाई।”
उन्होंने आगे कहा कि वर्तमान समय में जब युवा वर्ग आधुनिकता और तकनीकी संसाधनों के बीच तनावग्रस्त और दिशाहीन होता जा रहा है, तब भक्तिकालीन साहित्य का अध्ययन उन्हें विवेक, आत्मबल और सही निर्णय लेने की प्रेरणा प्रदान कर सकता है।
> “आज के युवा को अपने कर्म क्षेत्र में सफलता पाने के लिए भक्ति से शक्ति और विवेक दोनों प्राप्त करने चाहिए,” उन्होंने कहा।
डॉ. महंत ने भक्ति काल के दार्शनिक पहलुओं — द्वैत, अद्वैत, विशिष्टाद्वैत और शुद्ध अद्वैत — की व्याख्या करते हुए बताया कि इन सभी का मूल उद्देश्य जीवमात्र का कल्याण और आध्यात्मिक उत्थान रहा है। उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक और सामाजिक संरचना में भक्ति आंदोलन ने जनजागरण का कार्य किया, जिससे समाज में समानता, सद्भाव और धार्मिक सहिष्णुता की भावना को बल मिला।
कार्यक्रम का संचालन रजनी साहू ने किया। स्वागत श्रीमती लक्ष्मीन बाई मानिकपुरी ने किया, विभागाध्यक्ष सुश्री यशोदा शांते ने अतिथियों का अभिनंदन किया, जबकि आभार प्रदर्शन कमल सर ने किया।
सभागार विद्यार्थियों और प्राध्यापकों से खचाखच भरा हुआ था, जो डॉ. महंत के प्रेरक विचारों को ध्यानपूर्वक सुन रहे थे। कार्यक्रम का समन्वय हिंदी विभाग की सहायक प्राध्यापक श्रीमती लक्ष्मीन बाई मानिकपुरी और सुश्री यशोदा शांते ने किया।
अंत में यह संदेश स्पष्ट रूप से उभर कर सामने आया कि –
भक्तिकाल का साहित्य केवल अतीत की धरोहर नहीं, बल्कि आज के युग के लिए जीवन मार्गदर्शक है।
युवा पीढ़ी यदि सूर, तुलसी और कबीर के विचारों से प्रेरणा लेकर कर्म क्षेत्र में आगे बढ़े, तो सफलता और संतुलन दोनों निश्चित हैं।
भक्तिकाल के कवियों ने मानवता, प्रेम, करुणा और भक्ति का जो दीप प्रज्वलित किया,
भक्तिकाल के कवियों ने मानवता, प्रेम, करुणा और भक्ति का जो दीप प्रज्वलित किया, वही आज के तनावपूर्ण और प्रतिस्पर्धात्मक युग में जीवन को संतुलित करने की सबसे बड़ी शक्ति है। डॉ. फूलदास महंत का यह संदेश निश्चय ही युवाओं को नयी दिशा और प्रेरणा प्रदान करेगा।

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