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पुष्य नक्षत्र: शुभ कार्यों के लिए स्वर्णिम संयोग का दिन

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हिंदू पंचांग के अनुसार पुष्य नक्षत्र को सभी नक्षत्रों में सबसे शुभ और फलदायक माना गया है। इसे “नक्षत्रों का राजा” भी कहा जाता है। जब भी पुष्य नक्षत्र गुरुवार या रविवार को आता है, तो वह गुरु-पुष्य और रवि-पुष्य योग कहलाता है और इसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है।

पुष्य नक्षत्र का महत्व:
पुष्य का अर्थ होता है “पोषण करने वाला”। यह नक्षत्र जीवन में समृद्धि, स्वास्थ्य, उन्नति और शुभता लाने वाला होता है। इस दिन बिना किसी पंचांग देखे भी कोई भी शुभ कार्य किया जा सकता है – जैसे:
– घर, दुकान या वाहन की खरीदी
– सोना-चांदी या कीमती वस्तुओं की खरीदारी
– नए व्यापार की शुरुआत
– निवेश या बैंक खाता खोलना
– नौकरी के लिए आवेदन या इंटरव्यू
– विवाह के प्रस्ताव

आध्यात्मिक दृष्टिकोण से भी खास:
पुष्य नक्षत्र में भगवान बृहस्पति और माता लक्ष्मी की पूजा विशेष रूप से की जाती है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन किए गए दान, पूजन और मंत्र जाप का कई गुना फल मिलता है।

क्या न करें इस दिन:
– उधार न दें और न लें
– किसी से विवाद या कटु वचन से परहेज करें
– काले वस्त्र पहनने से बचें

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