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बस्तर संभाग में गौण खनिज रेत खदानों की ई-नीलामी पर तत्काल रोक लगाए सरकार: विक्रम मंडावी

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बस्तर संवाददाता – अर्जुन झा

= पंचायतों के संवैधानिक अधिकारों का हनन कर रही भाजपा सरकार: विक्रम =
जगदलपुर। राज्य की भाजपा सरकार के एक फैसले के खिलाफ बीजापुर के विधायक एवं कांग्रेस नेता विक्रम मंडावी फिर मुखर हो गए हैं। यह फैसला है गौण खनिज रेत खदानों की ई-नीलामी का। तेज तर्रार आदिवासी विधायक विक्रम मंडावी ने सरकार के इस फैसले को ग्राम पंचायतों और स्थानीय निकायों के संवैधानिक अधिकारों का हनन बताते हुए इसका कड़ा विरोध किया है और इस फैसले को तुरंत वापस लेने की मांग की है।
बुधवार को जारी एक बयान में विधायक विक्रम शाह मंडावी ने छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार से मांग की है कि बस्तर संभाग में गौण खनिज रेत खदानों की ई-नीलामी की प्रक्रिया पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार की नीति के अनुरूप रेत खदानें ग्राम पंचायतों को आवंटित की जाएं, ताकि ग्राम पंचायतों को आर्थिक रूप से सशक्त किया जा सके और ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति मिल सके।
विक्रम मंडावी ने गौण खनिज रेत खदानों की ई-नीलामी पर कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा कि बस्तर संभाग आदिवासी बहुल क्षेत्र है, जो भारतीय संविधान की पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत आता है। इस क्षेत्र में पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों में विस्तार) अधिनियम, 1996 पेसा कानून लागू है, जो ग्राम पंचायतों को प्राकृतिक संसाधनों पर अधिकार प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि रेत खदानों की ई-नीलामी की प्रक्रिया पंचायतों के संवैधानिक अधिकारों को खत्म करने का प्रयास है और यह पेसा कानून के प्रावधानों के खिलाफ है।

उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने का उपक्रम
कांग्रेस नेता एवं विधायक विक्रम मंडावी ने भाजपा पर उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने का आरोप लगाते हुए आगे कहा कि प्रदेश में जबसे भाजपा की डबल इंजन की सरकार बनी है तबसे भाजपा सरकार बस्तर संभाग के प्राकृतिक संसाधनों को बेचने का काम कर रही है। रेत खदानों के ई-नीलामी की प्रक्रिया भी रेत खदानों को बड़े उद्योगपतियों को बेचने का हिस्सा है, इससे शांतिप्रिय क्षेत्र में अशांति फैलेगी और युवाओं में बेरोजगारी बढ़ेगी।

आदिवासी क्षेत्र को कमजोर करने की साजिश
कांग्रेस नेता विक्रम मंडावी ने भाजपा की डबल इंजन सरकार पर आरोप लगाया कि वह आदिवासी क्षेत्रों में ग्राम पंचायतों को कमजोर करने की साजिश रच रही है। विक्रम मंडावी ने अपने आगे कहा कि रेत खदानों का आवंटन ग्राम पंचायतों को देने से न केवल पंचायतों का राजस्व बढ़ेगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और स्थानीय समुदायों के कल्याण के लिए आवश्यक है। इसके विपरीत, ई-नीलामी के जरिए रेत खदानों को निजी हाथों में सौंपने से बड़े ठेकेदारों को फायदा होगा, जबकि स्थानीय समुदाय और पंचायतें आर्थिक नुकसान झेलेंगी। कांग्रेस नेता विक्रम मंडावी ने यह भी कहा है कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने रेत खदानों को ग्राम पंचायतों को सौंपकर एक ऐसी व्यवस्था स्थापित की थी, जिसमें स्थानीय समुदायों को प्राकृतिक संसाधनों का लाभ मिलता था। इस नीति ने पंचायतों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया और ग्रामीण विकास को बढ़ावा दिया। उन्होंने मांग की कि भाजपा सरकार तत्काल ई-नीलामी की प्रक्रिया को रद्द करे और रेत खदानों को पुनः ग्राम पंचायतों को सौंपे, ताकि संवैधानिक प्रावधानों का सम्मान हो और आदिवासी क्षेत्रों में विकास की गति बनी रहे। उन्होंने यह भी कहा कि यदि भाजपा की डबल इंजन की सरकार ने इस मुद्दे पर तुरंत कार्रवाई नहीं की, तो कांग्रेस पार्टी जनहित में आंदोलन शुरू करने के लिए बाध्य होगी।

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