Home चर्चा में 17 अक्टूबर का दिन ऐतिहासिक: मुख्यमंत्री साय

17 अक्टूबर का दिन ऐतिहासिक: मुख्यमंत्री साय

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-नक्सली आत्मसमर्पण पर कहा मुख्यमंत्री साय ने

 -210 नक्सली समाज की मुख्यधारा में हुए शामिल 

 -छत्तीसगढ़ की बेहतर पुनर्वास नीति का सकारात्मक परिणाम 

अर्जुन झा/जगदलपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि 17 अक्टूबर का दिन बस्तर समेत छत्तीसगढ़ और पूरे देश के लिए महत्वपूर्ण है, ऐतिहासिक है। श्री साय ने कहा कि रास्ता भटककर समाज से अलग हो चुके लोग आज गांधीजी के अहिंसा के विचार और सरकार की पुनर्वास नीति पर विश्वास कर मुख्यधारा और अपने समाज में लौटे हैं। उन सभी को मेरी हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।

एकसाथ 210 नक्सलियों के आत्मसमर्पण के बाद जगदलपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बड़ा दुःख होता है कि नक्सलवाद के कारण मरने वाले और मारने वाले दोनों को बहुत तकलीफ हुई। हमने सतत अध्ययन कर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में बेहतर से बेहतर पुनर्वास नीति तैयार की। इसी का परिणाम है कि नक्सली आज माओवाद का रास्ता छोड़कर विकास की धारा से जुड़ रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ के इतिहास में आज तक ऐसा नहीं हुआ जब 210 से ज्यादा लोगों ने एक साथ आत्मसमर्पण किया हो, यह सब हमारी सरकार की पुनर्वास नीति से संभव हो रहा है। जिसमे आवास समेत अन्य जरुरी सुविधाओं का ध्यान रखा गया है। आवास नीति में भी हमने विशेष प्रावधान किया है, साथ ही नई उद्योग नीति में भी कई तरह के प्रावधान हैं। उन्होंने आत्मसमर्पित नक्सलियों के भविष्य को लेकर कहा कि हम उन्हें सरकार की सभी योजनाओं का लाभ प्रदान करेंगे ताकि उनका भविष्य उज्जवल हो। मुख्यमंत्री ने कहा कि मुझे ख़ुशी है कि ऐसा क्षेत्र जो नक्सलवाद के कारण विकास की पहुंच से अछूता था, वहां सरकार की योजनाओं का लाभ पहुंच रहा है। नियद नेल्लानार जैसी योजनाओं के तहत इन क्षेत्रों में सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य की सुविधाओं का विस्तार हो रहा है। पक्की सड़कों से कनेक्टिविटी बढ़ रही है। श्री साय ने कहा कि आत्मसमर्पित लोगों को 3 वर्ष तक आर्थिक सहायता प्रदान किया जाएगी। जिससे उनका जीवन अच्छा और अभावरहित बीत सके।

उत्तर-पश्चिम हुआ साफ: शर्मा

इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा कहा कि ने आज का दिन बस्तर के लिए ऐतिहासिक है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की संवेदनशील पहल पर हम अपने संकल्प पूर्ति की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। बस्तर की जनता के मनोभाव के अनुरूप आज माओवादी संगठन के 210 लोगों ने पुनर्वास करने का निर्णय लिया और नए जीवन को चुना। सरकार से बड़ा समाज होता है यह सोचकर माओवादी संगठनों ने समाज के समक्ष पुनर्वास का निर्णय लिया गया। आज बस्तर में समाज के मानबिंदु मांझी, चालकी, गायता और पुजारियों ने समाज की मुख्यधारा में उनका स्वागत किया। उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने बताया कि जल्द ही और भी लोग हिंसा का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण करने जा रहे हैं। केंद्रीय गृहमंत्री ने 31 मार्च 2026 तक माओवाद के खात्मे का संकल्प किया था, यह संकल्प पूरा हो रहा है। मुख्यधारा में वापसी को लेकर ललक बढ़ रही है।

आत्मसमर्पित लोगों के पुनर्वास को लेकर हमारी नीति स्पष्ट रूप से समझाई जा रही है। आज माड़ डिवीजन की पूरी कमेटी, गढ़चिरौली की कमेटी, कंपनी वन, कंपनी दस, संचार टीम, प्रेस टीम, डॉक्टर टीम पूरी ने आत्मसमर्पण किया है। अब उत्तर पश्चिम क्षेत्र पूरी तरह क्लीयर हो चुका है। प्रेसवार्ता में उप मुख्यमंत्री अरुण साव, सांसद बस्तर महेश कश्यप, विधायक जगदलपुर किरण देव, विधायक चित्रकोट विनायक गोयल, विधायक दंतेवाड़ा चैतराम अटामी, छत्तीसगढ़ ब्रेवरेज कारपोरेशन के अध्यक्ष श्रीनिवास राव मद्दी, महापौर संजय पाण्डेय सहित अन्य जनप्रतिनिधि और पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक नक्सल ऑपरेशन विवेकानंद सिन्हा सहित सीआरपीएफ, बीएसएफ एवं आईटीबीपी के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, कमिश्नर बस्तर डोमन सिंह, पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी, कलेक्टर हरिस एस, पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा और कोंडागांव, नारायणपुर, दंतेवाड़ा, सुकमा एवं बीजापुर जिले के एसपी, सीआरपीएफ, बीएसएफ एवं आईटीबीपी के अधिकारी मौजूद रहे।

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