= अब भाजपा के लोग भी कन्वरर्जन के खिलाफ आने लगे हैं सामने =
-अर्जुन झा-
जगदलपुर। बस्तर संभाग में कन्वर्टेड लोगों की घर वापसी की लहर अब आंधी में तब्दील होती जा रही है। घर वापसी का अभियान रफ्तार पकड़ चुका है। एक के बाद एक लोग अपने मूल धर्म में वापस लौट रहे हैं। बड़ी बात तो यह है कि भूले भटके और बहके लोगों की घर वापसी कराने के लिए अब भाजपा के लोग भी आगे आ चुके हैं। हालांकि इन भाजपा नेताओं का कहना है कि वे अपनी जाति समुदाय की धर्म परंपरा को बचाने के लिए ऐसा कर रहे हैं, न कि राजनैतिक उद्देश्य से।

बस्तर संभाग में आदिवासी समुदाय के अस्तित्व पर धर्मांतरण ने बड़ा खतरा पैदा कर दिया है। कन्वर्जन कराने वाले लोग बस्तर के गांव गांव में सक्रिय हैं। बीमारियां, पारिवारिक समस्याएं दूर करने जैसे बहकावे और प्रलोभन में आकर हजारों आदिवासी परिवार धर्मांतरित हो चुके हैं। गांवों में देवगुड़ी मातागुड़ी की संख्या घटती जा रही है और प्रार्थना स्थलों की संख्या तेजी से बढ़ती जा रही है। घरों से देवी देवताओं के चित्र गायब हो चुके हैं, महिलाओं ने मांग में सिंदूर भरना, चूड़ियां, मंगलसूत्र पहनना बंद कर दिया है। ऐसे लोग अपनी प्राचीन परंपराओं, संस्कृति और पूजा पद्धति को पूरी तरह त्याग चुके हैं। वे मृतकों का दाह संस्कार करना छोड़ शवों को दफनाने लगे हैं। इसे लेकर गांवों में अक्सर विवाद की स्थिति निर्मित होती रही है। मगर अब आदिवासी समाज जाग उठा है। समाज के पढ़े लिखे और जागरूक लोग कन्वर्ट हो चुके लोगों को समझा बुझाकर उन्हें पुनः उनके मूल धर्म से जोड़ रहे हैं। बस्तर संभाग के कांकेर जिले के अनेक गांवों से धर्मांतरित हो चुके लोगों की मूल धर्म में वापसी का जो सिलसिला शुरू हुआ, वह अब सुकमा जिले तक पहुंच चुका है। घर वापसी की बड़ी खबर संभाग के सुकमा जिले से सामने आई है। सुकमा जिले ग्राम पंचायत छिंदगढ़ रानीबाहर में एक समुदाय द्वारा ग्रामवासियों को बहला फुसला कर व प्रलोभन लालच देकर कई परिवारों का जबरन धर्मांतरण कराया गया था। इनमें से 6 परिवारों के लगभग 26 लोगो ने घर वापसी कर अपने समाज व अपने रीति रिवाज को अपना लिया है। ये परिवार तीन साल पहले कन्वर्ट हुए थे। सुकमा जमींदार परिवार के सदस्य एवं ग्राम रानीबहाल के युवराज विक्रांत सिंह देव, जिला पंचायत सदस्य हुंगाराम मरकाम, बीजेपी युवा मोर्चा अध्यक्ष संजय सोढ़ी, ग्राम के प्रमुखजनों, पुजारी की उपस्थिति में इन 6 परिवारों की घर वापसी कराई गई। हूंगा राम मरकाम ने कहा है कि इन लोगों को दूसरे धर्म के लोगों द्वारा बहला फुसला कर दूसरे धर्म को अपनाने के लिए मजबूर किया गया था। हमारे द्वारा समझाईश दी जाने पर इन परिवारों ने अपने मूल धर्म में वापसी की है अब आने वाले दिनों में और लोगों की घर वापसी होगी। कन्वर्टेड लोग
समाज से बाहर थे अब उन्हें वापस समाज से जोड़ लिया गया है। उन्हें तिलक लगा कर, चावल और फूल सौंपकर एवं धरती माता को स्पर्श कराया गया। पानी में हल्दी, तुलसी पता डालकर उसे जात का रूप दिया गया। इस जल को गंगाजल जैसा पवित्र माना जाता है। इस जल को घर वापसी कर रहे लोगों पर छिड़का गया और धरती माता को भी अर्पित किया गया। माटी पुजारी ने धार्मिक प्रक्रियाएं संपन्न कराईं। अब ये सभी परिवार गांव के सार्वजनिक एवं सामाजिक क्रियाकलापों और धार्मिक कार्यक्रमों में पहले की तरह भाग ले सकेंगे।









