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आज मन की बात में मोदी ने की अंबिकापुर के “गार्बेज-कैफे” की तारीफ़

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अंबिकापुर का “गार्बेज-कैफे” : 1 किलो प्लास्टिक लाओ, गरम भोजन पाओ

अंबिकापुर:

छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में एक अनूठी स्वच्छता पहल ― “गार्बेज-कैफे” ― पूरे देश में चर्चा का विषय बनी है। इस पहल ने न केवल स्थानीय नागरिकों को जागरूक किया है बल्कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम मन की बात में इसकी सराहना भी किए जाने से इसे और गति मिली है।
पहल का सार
– इस कैफे की रूपरेखा यह है कि यदि कोई नागरिक 1 किलो प्लास्टिक कचरा लाता है तो उसे लंच या डिनर के रूप में गरम भोजन मिलता है, वहीं लगभग ½ किलो प्लास्टिक लाने पर ब्रेकफास्ट मिलता है।
– यह कैफे मुख्य रूप से अंबिकापुर महानगर पालिका द्वारा संचालित है।
– इस पहल का मकसद है प्लास्टिक कचरे को कम करना, शहर को स्वच्छ बनाना तथा नागरिकों को सहभागी बनाना।
प्रधानमंत्री का उल्लेख
प्रधानमंत्री ने ‘मन की बात’ के नवीन अंक में इस पहल को पॉइंट-आउट किया और कहा कि “अंबिकापुर में अनोखी पहल शुरू हुई है … जिसमें प्लास्टिक कचरा लाने वाले को भोजन मिलता है”।
उन्होंने इसे प्रेरणादायी उदाहरण बताया कि कैसे संकल्प के साथ बदलाव लाया जा सकता है।
इस पहल की विशेषताएं एवं प्रभाव
अंबिकापुर ने “दर-दर कचरा संकलन एवं घरेलू स्तर पर अलगाव” जैसी व्यवस्था को अपनाया है तथा इस तरह की पहल से शहर स्वच्छता में आगे बढ़ा है।
कैफे की टैगलाइन है: “More the waste, better the taste” (जितना अधिक कचरा, उतना बेहतर स्वाद) – इस तरह मज़बूती से संदेश जाता है।
इस तरीके से न सिर्फ प्लास्टिक कचरा कम हो रहा है, बल्कि भूख और भोजन-सुरक्षा जैसे सामाजिक आयाम भी छू रहे हैं।
इस तरह की सफल पहल को अन्य शहरों-नगरों में भी अपनाया जा सकता है। प्रधानमंत्री ने इस तरह की पहलों को बढ़ावा देने का आह्वान किया है। इसमें ध्यान दिया जाना चाहिए कि प्लास्टिक कचरे को उचित पुनर्चक्रण-मार्ग मिले।
इस तरह की सामाजिक-उद्योगीक पहल स्थानीय नागरिक-समाज, स्कूल-कॉलेज, स्व-सहायता समूहों के साथ मिलकर हों। स्थिरता बनी रहे — यानी लुभावने भोजन से सिर्फ शुरुआत न हो, बल्कि यह दैनिक व्यवहार का हिस्सा बने।

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