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“शिक्षा संस्थान में अन्याय की कहानी” जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान जांजगीर में व्याख्याता रमा गोस्वामी के साथ उत्पीड़न का मामला गंभीर — न्याय की गुहार लेकर पहुँची कलेक्टर कार्यालय, शासन-प्रशासन मौन क्यों?

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जांजगीर चांपा संवाददाता – राजेन्द्र जायसवाल
 जिला जांजगीर-चांपा , छत्तीसगढ़।
जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) जांजगीर में एक महिला व्याख्याता के साथ उत्पीड़न का गंभीर मामला सामने आया है। संस्था में कार्यरत व्याख्याता श्रीमती रमा गोस्वामी ने अपने वरिष्ठ अधिकारियों पर मानसिक, सामाजिक और प्रशासनिक उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं।
पीड़िता ने 29 अक्टूबर 2025 को कलेक्टर जन्मेजय महोबे को तीन पृष्ठों का आवेदन सौंपकर विस्तृत घटनाक्रम प्रस्तुत किया और न्याय की गुहार लगाई है। आवेदन में उन्होंने जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ), प्रभारी प्राचार्य बी.पी. साहू, शिक्षिका कल्याणी बोस एवं सहायक शिक्षक मिली सिंह क्षत्रिय के खिलाफ गंभीर शिकायतें दर्ज कराई हैं।
रजिस्टर में हस्ताक्षर से रोका गया — खुलेआम अपमान
रमा गोस्वामी ने बताया कि 9 अक्टूबर 2025 को उन्हें संस्था के उपस्थिति रजिस्टर में हस्ताक्षर करने से रोका गया, जबकि वे पूरे समय संस्था में उपस्थित थीं।
जब उन्होंने रजिस्टर मांगा, तो शिक्षिका कल्याणी बोस ने कहा —
> “रजिस्टर नहीं दूंगी, जो करना है कर लो।”
पीड़िता ने इस मामले की शिकायत डीईओ और कलेक्टर दोनों से की, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं की गई।
सार्वजनिक रूप से चरित्र हनन — महिला उत्पीड़न समिति पर प्रश्नचिह्न
दिनांक 15 अक्टूबर 2025 को डीईओ निरीक्षण हेतु संस्था पहुंचे। इस दौरान जब रमा गोस्वामी ने अपनी बात रखी, तो सहायक शिक्षक मिली सिंह क्षत्रिय ने समस्त स्टाफ के सामने कहा —
> “रमा गोस्वामी एक जेंट्स से बात कर रही थी, उससे मिलने कोई आया था।”
चौंकाने वाली बात यह है कि महिला उत्पीड़न समिति की पीठासीन अधिकारी कल्याणी बोस ने इस पर सहमति जताई।
रमा गोस्वामी ने इसे अपने आत्मसम्मान और गरिमा पर सीधा प्रहार बताया और पूछा —
“क्या किसी महिला का किसी पुरुष से बात करना अपराध है?”
योग्य व्याख्याता को अधिकारों से वंचित
पीड़िता रमा गोस्वामी एम.एससी., एम.एड. जैसी उच्च शैक्षणिक योग्यता रखती हैं और 23 वर्षों का अनुभव रखती हैं।
इसके बावजूद उन्हें प्रशिक्षण कार्य से वंचित रखा गया है, जबकि डीएलएड (12वीं पास) सहायक शिक्षक को व्याख्याता का कार्य सौंपा गया है।
यह शिक्षा विभाग के नियमों की अवहेलना और योग्यता का अपमान है।
डीईओ की अपमानजनक टिप्पणी — “प्रभारी प्राचार्य आपका बाप है”
रमा गोस्वामी ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने डीईओ से शिकायत की, तो उन्होंने अपमानजनक लहजे में कहा —
> “प्रभारी प्राचार्य आपका बाप है, थप्पड़ तो मारेगा ही।”
और आगे कहा —
“आपका मानसिक स्वास्थ्य खराब है, इलाज करवाइए।”
ऐसे शब्द किसी भी अधिकारी के मुंह से निकलना न केवल अमर्यादित है, बल्कि शासन की साख और महिला सम्मान दोनों पर प्रश्नचिह्न लगाता है।
डर और दबाव का वातावरण
पीड़िता ने बताया कि डीईओ ने अपनी डायरी में उनका नाम दर्ज करते हुए कहा —
> “रमा गोस्वामी और सुरेश साहू का संभाग से बाहर ट्रांसफर करेंगे।”
इससे यह स्पष्ट होता है कि जांच के नाम पर कर्मचारियों को डराने और दबाव बनाने का माहौल बनाया जा रहा है।
कलेक्टर से न्याय की गुहार — “यदि न्याय नहीं मिला, तो इच्छा मृत्यु की अनुमति दी जाए”
अपने आवेदन में रमा गोस्वामी ने लिखा —
> “यदि मुझे न्याय नहीं मिल सकता, तो मुझे इच्छा मृत्यु की अनुमति दी जाए। न्याय की आस में आखिर किसकी शरण लूँ?”
यह शब्द एक शिक्षिका की पीड़ा और प्रशासनिक संवेदनहीनता की चरम स्थिति को उजागर करते हैं।
प्रशासन और शासन से गंभीर सवाल
1. क्या जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा इस तरह की अभद्र टिप्पणी करना उचित है?
2. यदि महिला उत्पीड़न समिति की पीठासीन अधिकारी ही उत्पीड़न में शामिल हों, तो न्याय कौन देगा?
3. क्या योग्य व्याख्याताओं को सिर्फ इसलिए अपमानित किया जाएगा क्योंकि वे अन्याय के खिलाफ आवाज उठाती हैं?
न्याय की मांग
रमा गोस्वामी ने मांग की है कि —
जिला शिक्षा अधिकारी, प्रभारी प्राचार्य बी.पी. साहू, कल्याणी बोस और मिली सिंह क्षत्रिय पर कड़ी अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाए।
उन्हें न्यायिक सुरक्षा और सम्मानजनक कार्य वातावरण उपलब्ध कराया जाए।
चरित्र हनन करने वाले अधिकारियों से सार्वजनिक माफी दिलाई जाए।
जनता और शासन की जिम्मेदारी
यह मामला केवल एक महिला व्याख्याता का नहीं, बल्कि महिला सम्मान, शिक्षा विभाग की पारदर्शिता और प्रशासनिक जव…

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