हर साल 3 नवंबर को हम अन्नपूर्णा महाराणा जी की जयंती पर उन्हें श्रद्धा के साथ याद करते हैं। वे न सिर्फ ओडिशा की, बल्कि पूरे भारतवर्ष की उन महान महिलाओं में शामिल थीं, जिन्होंने देश की आज़ादी के लिए अपना सर्वस्व समर्पित कर दिया।
अन्नपूर्णा महाराणा का जन्म 1923 में ओडिशा के एक प्रतिष्ठित स्वतंत्रता सेनानी परिवार में हुआ था। उनके पिता भक्त चरण महाराणा और माता रामादेवी स्वयं गांधीवादी विचारधारा से प्रेरित स्वतंत्रता सेनानी थे। अन्नपूर्णा जी ने बाल्यकाल से ही राष्ट्रभक्ति और सेवा का पाठ सीखा और महात्मा गांधी के ‘नमक सत्याग्रह’ से लेकर ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ तक में सक्रिय भागीदारी निभाई।
वे विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों के अधिकारों के लिए आज़ादी के बाद भी लगातार काम करती रहीं। उन्होंने शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक सुधार के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया।
उनका जीवन सत्य, अहिंसा और सेवा की मिसाल है। अन्नपूर्णा महाराणा को भारत सरकार ने 2002 में पद्मश्री से सम्मानित किया था।
आज उनकी जयंती पर देश उन्हें नमन करता है और उनके साहस, समर्पण और योगदान को याद कर प्रेरणा लेता है।









