भारत और इस्राइल ने मंगलवार को एक बड़ा रक्षा समझौता किया, जिसके तहत दोनों देशों के बीच उन्नत तकनीकों को साझा करने, मिलकर हथियार प्रणालियां और सैन्य उपकरण विकसित व तैयार करने का रास्ता खुलेगा. यह दोनों देशों के रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है. रक्षा सहयोग के लिए इस समझौते (एमओयू) पर तेल अवीव में भारत-इस्राइल रक्षा सहयोग की संयुक्त कार्य समूह (जेडब्ल्यूजी) की बैठक के बाद हस्ताक्षर किए गए. रक्षा मंत्रालय ने यह जानकारी दी. बता दें कि, इजरायल के विदेश मंत्री गिडोन सार ने भारत को ग्लोबल पावर बताया है.
रक्षा मंत्रालय ने बताया कि यह समझौता दोनों देशों के बीच पहले से मजबूत रक्षा संबंधों को और गहरा करने के लिए एक समान दृष्टिकोण और नीति को दिशा देने के मकसद से किया गया है. मंत्रालय ने कहा, भारत-इस्राइल की रक्षा साझेदारी लंबे समय से चली आ रही है, जो आपसी भरोसे और साझा सुरक्षा हितों पर आधारित है. समझौते में सहयोग के कई क्षेत्रों की पहचान की गई है, जिनसे दोनों देशों को फायदा होगा.
विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि भारत और इजरायल के बीच बहुत मजबूत और भरोसेमंद संबंध हैं. उन्होंने कहा, ‘हम दोनों देश आतंकवाद की गंभीर चुनौती का सामना कर रहे हैं. जरूरी है कि हम आतंकवाद के हर रूप और हर स्तर पर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर कायम रहें.’ उन्होंने यह भी जोड़ा कि भारत पश्चिम एशिया क्षेत्र के घटनाक्रमों पर करीबी नजर रखता है. जयशंकर ने कहा कि भारत इजरायली बंधकों की वापसी का स्वागत करता है और गाजा में शांति समझौते के प्रयासों का समर्थन करता है. उन्होंने उम्मीद जताई कि क्षेत्र में टिकाऊ शांति स्थापित होगी. विदेश मंत्री ने यह भी दोहराया कि भारत और इजरायल की सामरिक साझेदारी स्थिरता और परस्पर विश्वास पर आधारित है.









