बस्तर संवाददाता – अर्जुन झा
जनजाति गौरव दिवस पर कराकी में भव्य आयोजन
धर्मांतरित 3 परिवारों ने की मूल धर्म में वापसी
जगदलपुर। बस्तर संभाग के कांकेर जिले की दुर्गूकोंदल तहसील की कोडेकुर्से पंचायत के ग्राम कराकी में जनजाति गौरव तब फिर जीवंत हो उठा, जब गांव के तीन मतांतरित तीन आदिवासी परिवारों ने अपनी प्राचीन सभ्यता, संस्कृति और परंपराओं के गौरव को समझते हुए अपने मूल धर्म में वापसी कर ली।
धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती एवं जनजाति गौरव दिवस के अवसर पर कराकी गांव में एक बड़ा और ऐतिहासिक सामाजिक कार्यक्रम आयोजित हुआ। इस विशेष अवसर पर गांव के तीन ईसाई धर्मांतरित परिवारों ने सार्वजनिक रूप से अपने मूल धर्म एवं पारंपरिक आदिवासी संस्कृति में पुनः वापसी की घोषणा की। क्षेत्र में बढ़ती धर्मांतरण की घटनाओं के बीच यह पहल आदिवासी समाज की एकजुटता और सांस्कृतिक जागरूकता को मजबूत करने वाली मानी जा रही है। कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण, समाज प्रमुख, जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ नागरिक उपस्थित रहे। खुले प्रांगण में महिलाओं और पुरुषों ने कतारबद्ध होकर बिरसा मुंडा जी के चित्र के समक्ष श्रद्धांजलि अर्पित की। फोटो में साफ दिख रहा है कि समाज का हर वर्ग इस आयोजन में सक्रिय रूप से शामिल था, जो इस कार्यक्रम की गंभीरता और सामूहिक भावना को दर्शाता है।
पूजा-अर्चना कर की वापसी
मूल धर्म में शामिल होने वाले तीनों परिवारों का गांव के पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार स्वागत किया गया। समाज प्रमुखों द्वारा पूजा- अर्चना, मंत्रोच्चारण और शॉल -श्रीफल भेंटकर उन्हें पुनः पारंपरिक समाज में शामिल किया गया। इस दौरान जनप्रतिनिधियों ने कहा कि हम सभी भगवान बिरसा मुंडा के पदचिन्हों पर चलकर अपनी संस्कृति, परंपरा और मूल पहचान को संजोए रखने का संकल्प लेते हैं। समाज के नेताओं ने यह भी बताया कि गांव और आसपास के क्षेत्रों में धर्म परिवर्तन की बढ़ती घटनाओं को लेकर लोगों में गहरा असंतोष है और इसी जागरूकता के चलते कई परिवार अब पुनः अपनी जड़ों की ओर लौट रहे हैं।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने भगवान बिरसा मुंडा के संघर्ष, बलिदान और आदिवासी स्वाभिमान की रक्षा के लिए किए गए उनके अद्वितीय कार्यों को याद किया। उन्होंने कहा कि बिरसा मुंडा ने हमेशा आदिवासी समाज को जागरूक, संगठित और आत्मनिर्भर रहने का संदेश दिया था और आज भी उनकी विचारधारा जनजातीय समाज को दिशा दे रही है। इस दौरान देवेन्द्र जिला पंचायत सदस्य देवेंद्र टेकाम, सरपंच साधना सहारे, धनसिंह पुंगाटी, पूर्व जनपद सदस्य धनीराम ध्रुव, चैनसिंह कोवाची, बहादुर तुलावी, रामप्रसाद पुंगाटी, नामदेव मरकाम, रामलाल जैन, हीरालाल कोमरे, दुर्जन सिंह कुमेटी, जागेश्वर टेकाम,
हलालराम सलाम, नरेश कोमरे, नारायण सिंह पटेल, शिवलाल उसेंडी, श्यामलाल पद्दा, राजनाथ उईके, राजेश हिड़को, गजेश जाड़े, अमर सिंह के साथ-साथ बड़ी संख्या में महिलाएं, युवा और ग्रामीण इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बने।
समाज की अपील
समाज प्रमुखों ने अंत में क्षेत्र के सभी धर्मांतरित परिवारों से अपील की कि वे अपनी मूल संस्कृति, परंपरा, देवी-देवताओं और जनजातीय पहचान को अपनाकर समाज की एकता और मजबूती को बनाए रखें।









