भारत के स्वतंत्रता संग्राम की अग्रदूत और वीरता की मिसाल रानी लक्ष्मीबाई की जयंती पर आज पूरा देश उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा है। झांसी की रानी के नाम से प्रसिद्ध लक्ष्मीबाई का जन्म 19 नवम्बर 1828 को वाराणसी में हुआ था। उनका बचपन का नाम मणिकर्णिका था, लेकिन इतिहास उन्हें रानी लक्ष्मीबाई के नाम से जानता है।
उन्होंने न केवल अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह का नेतृत्व किया, बल्कि महिलाओं को भी यह सिखाया कि विपरीत परिस्थितियों में भी साहस और आत्मबल से लड़ा जा सकता है। 1857 की क्रांति में उनका योगदान अमिट है। “मैं अपनी झांसी नहीं दूंगी” जैसे प्रेरणादायक शब्द आज भी हर भारतीय के दिल में देशभक्ति की लौ जलाते हैं।
रानी लक्ष्मीबाई सिर्फ एक योद्धा नहीं थीं, बल्कि एक विचार थीं, एक प्रेरणा थीं और हैं, जो हर युग की महिलाओं को साहस और आत्मनिर्भरता का संदेश देती हैं। उनकी जयंती पर हम सभी को उनके अदम्य साहस, नेतृत्व और बलिदान से प्रेरणा लेकर राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों का स्मरण करना चाहिए।









