जांजगीर-चांपा संवाददाता – राजेन्द्र जायसवाल
दिसंबर के अंतिम सप्ताह में देशभर के पहलवान चांपा में जमाएंगे दांव–पेंच
जल्द बनेगी आयोजन समिति, मुख्यमंत्री से 5 लाख वार्षिक अनुदान की मांग
चांपा नगर, जो कोसा–कांसा–कंचन की पहचान के साथ कुश्ती की राष्ट्रीय परंपरा के लिए भी प्रसिद्ध रहा है, एक बार फिर अखाड़ों की गूंज से जीवंत होने जा रहा है। स्वर्गीय गुरुजी मोहित राम यादव की स्मृति में राष्ट्रीय स्तर की कुश्ती प्रतियोगिता के आयोजन की तैयारी शुरू कर दी गई है। देशभर के विभिन्न राज्यों के अखाड़ों के नामी पहलवान दिसंबर के अंतिम सप्ताह में चांपा में दांव-पेंच आजमाते नजर आएंगे।
हनुमान व्यायाम शाला सेवा समिति के अध्यक्ष गिरधारी यादव ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि उनके पिता स्व. गुरुजी मोहित राम यादव ने वर्ष 1952 में डोगाघाट स्थित मंदिर परिसर में श्री हनुमान व्यायाम शाला की स्थापना की थी, जहां से नगर की कुश्ती परंपरा ने राष्ट्रीय पहचान प्राप्त की। इसी अखाड़े में वर्षों तक राष्ट्रीय स्तर की कुश्ती प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती रहीं और देशभर से पहलवान भाग लेने आते रहे। वर्ष 2019 तक यह आयोजन निरंतर होता रहा, परंतु कोरोना काल में प्रतियोगिता बंद हो गई थी।
उन्होंने बताया कि अब इस परंपरा को पुनः शुरू करने का निर्णय लिया गया है। प्रतियोगिता के सफल आयोजन के लिए जल्द ही आयोजन समिति का गठन किया जाएगा। समिति में खेल प्रेमियों, स्थानीय प्रतिनिधियों और अनुभवी पहलवानों को शामिल किया जाएगा।
गिरधारी यादव ने यह भी बताया कि चांपा की ऐतिहासिक “मिट्टी दंगल” प्रतियोगिता को पुनर्जीवित करने के लिए उन्होंने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र लिखकर प्रतिवर्ष 5 लाख रुपए के सरकारी अनुदान की मांग की है। उन्होंने कहा कि स्व. गुरुजी मोहित राम यादव ने चांपा को कुश्ती के क्षेत्र में राष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित किया था, इसलिए आवश्यक है कि सरकार खेलकूद को प्रोत्साहन देने के लिए अपना सहयोग प्रदान करे।
उल्लेखनीय है कि जिस अखाड़े से चांपा की कुश्ती परंपरा की नींव पड़ी थी, उसे हाल ही में कथित मंदिर समिति ने तोड़ दिया, जिसके खिलाफ कानूनी लड़ाई जारी है। इसी बीच इस प्रतियोगिता के आयोजन की घोषणा कुश्ती प्रेमियों के लिए एक बड़ी खुशखबरी मानी जा रही है।
दिसंबर के अंत में होने वाली यह राष्ट्रीय कुश्ती प्रतियोगिता न केवल चांपा की परंपरा को नई दिशा देगी, बल्कि युवाओं में खेल और व्यायाम के प्रति नए उत्साह का संचार भी करेगी।









