कोरबा संवाददाता – संजू वैष्णव
ग्राम नवलपुर नाका।
लगभग 50 वर्षों से ग्राम समाज के सामुदायिक उपयोग में रही भूमि पर कब्जे को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। ग्रामीणों ने पटढ़ी निवासी सुमन कल्याण पर आरोप लगाया है कि वे कूटनीति पूर्वक इस सामुदायिक भूमि को अपने नाम दर्शाने का प्रयास कर रहे हैं।
ग्रामीणों के अनुसार यह भूमि वर्षों से सार्वजनिक सुविधाओं के विकास एवं संचालन में उपयोग की जा रही है। इस क्षेत्र में वर्तमान में शासकीय अस्पताल, विद्यालय, आंगनवाड़ी सहित अनेक सरकारी संस्थान संचालित हैं, जिनका सीधा लाभ स्थानीय समुदाय और बच्चों—महिलाओं—बीमारों—परिवारों तक पहुँचता है।

ग्रामीणों ने बताया कि आधार अभिलेखों में इस भूमि का उल्लेख ‘बड़े झाड़ का जंगल’ के रूप में दर्ज है, जबकि ऑनलाइन रिकॉर्ड में इसे सुमन कल्याण के नाम पर दिखाया जा रहा है — जो ग्रामीणों के अनुसार दस्तावेज़ी विसंगति और संभावित हेराफेरी का संकेत है। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि उन्हें इन विरोधों के बाद नोटिस भेजकर दबाव डालने की कोशिश की जा रही है।
इस संदर्भ में बुधवार को ग्रामीणों ने जनपद उपाध्यक्ष मनोज झा से मुलाकात कर उन्हें एक लिखित ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन प्राप्त करने के बाद मनोज झा ने ग्रामीणों को आश्वस्त करते हुए कहा:
“जब तक न्याय नहीं मिलता, मैं आपके साथ खड़ा रहूंगा।”

गांव की महिलाओं ने भी इस मामले में अपनी स्पष्ट और साहसिक आवाज उठाई —
राधा बाई ने कहा:
“हमने अपनी आँखों के सामने यहाँ स्कूल बनते देखा, अस्पताल बनते देखा। यह सरकारी और गाँव की ज़मीन है। किसी एक व्यक्ति के नाम पर इसे कैसे दर्ज किया जा सकता है?”
बसंती बाई ने कहा:
“हम गरीब लोग हैं, लेकिन सच के साथ हैं। हमें बेघर या बेज़मीन बनाने का कोई हक़ किसी को नहीं। जाँच होनी चाहिए और सही बात सामने आनी चाहिए।”
भगवती राजपूत ने कहा:
“हमें नोटिस भेजकर डराया जा रहा है। हम दबेंगे नहीं। हम अपनी ज़मीन के लिए अंत तक लड़ेंगे।”
उषा बड़ाइक ने कहा:
“अगर यह ज़मीन किसी निजी नाम पर चली गई तो आंगनवाड़ी, स्कूल, अस्पताल—सब प्रभावित होंगे। इससे गाँव की आने वाली पीढ़ियाँ नुकसान में रहेंगी।”
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि जमीन का वास्तविक रिकॉर्ड, पुरालेख, सीमांकन एवं स्वामित्व की निष्पक्ष जाँच की जाए, तथा इस विवादित भूमि पर किसी भी निजी कब्जे के प्रयास को रोका जाए।
स्थानीय स्तर पर यह मुद्दा अत्यंत संवेदनशील हो चुका है और ग्रामीणों की निगाहें अब प्रशासनिक जाँच और संभावित कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।









