Home कोरबा बालको प्रबंधन के अड़ियल रवैये पर उठे सवाल

बालको प्रबंधन के अड़ियल रवैये पर उठे सवाल

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कोरबा।
बालको प्रबंधन के अड़ियल रवैये और नियमों की खुलेआम अवहेलना को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। पूर्व मंत्री श्री जयसिंह अग्रवाल द्वारा कलेक्टर कोरबा के माध्यम से की गई शिकायत पर यह मामला प्रकाश में आया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि नवीन बालको टाउनशिप प्रोजेक्ट G+9 बहुमंजिला अपार्टमेंट स्थल पर वृक्षों की कटाई और स्थानांतरण की अनुमति न होने के बावजूद निर्माण कार्य जारी रखा गया, जो नियमों का सीधा उल्लंघन है।

 

सूत्रों के अनुसार, आलुवालिया कंपनी को बालको द्वारा इस निर्माण कार्य का अनुबंध दिया गया है। आदेशानुसार, शिकायत के निराकरण तक सभी प्रकार के निर्माण कार्य रोकने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन बालको प्रबंधन और ठेकेदार कंपनी ने इस आदेश को भी नज़रअंदाज़ किया।

वनमंडलाधिकारी कार्यालय वनमंडल कोरबा द्वारा आलुवालिया कंपनी को केवल खानापूर्ति के तौर पर पत्र दिए जाने और वास्तविक कार्रवाई से बचने पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि नियोक्ता कंपनी बालको पर कार्यवाही करते हुए निर्माण स्थल पर मौजूद मशीनरी जब्त की जानी चाहिए थी और संबंधित विभागीय अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाना चाहिए था, परंतु ऐसा नहीं किया गया।

सबसे गंभीर चिंता यह है कि निर्माण स्थल के ठीक पास स्थित पुराने बालसदन स्कूल में छोटे बच्चे रोज पढ़ने आते हैं, जिससे उनकी सुरक्षा को प्रत्यक्ष खतरा बना हुआ है। इसके बावजूद जिम्मेदार विभाग और प्रशासन खामोश हैं।

प्रोजेक्ट G+9 नवीन बालको टाउनशिप का पहला भूमिपूजन 14 फरवरी 2022 को उस समय के CEO अभिजीत पति द्वारा किया गया था, लेकिन पर्यावरण अनुमति और जमीन विवाद के चलते निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका। हैरानी की बात यह है कि तीन साल बाद 17 नवंबर 2025 को दोबारा भूमिपूजन कर निर्माण शुरू करने का प्रयास किया गया, जबकि अनुमति प्रक्रिया को लेकर कई अनियमितताएं सामने आती रहीं।

शिकायत में यह भी उल्लेख है कि बालको प्रबंधन ने संबंधित विभागों को बिना जानकारी दिए, फर्जी दस्तावेजों के आधार पर अनुमति लेने की कोशिश की, जिससे आपत्ति और बाद में अनुमति निरस्त होने की स्थिति बनी। बावजूद इसके, प्रबंधन ने कथित रूप से “सबको मैनेज कर लिया है” जैसे दावे करते हुए निर्माण जारी रखा।

आरोप है कि 50 से 100 वर्ष पुराने बरगद, साल, सरई, पीपल जैसे विशालकाय पेड़ों सहित आम, जामुन, अमरूद, कटहल जैसे फलदार वृक्षों की कुल 400 से अधिक संख्या को स्थानांतरित करने की अनुमति न्यायालय द्वारा निरस्त की जा चुकी है, परंतु न्यायालय के आदेश की भी अवहेलना की गई।

17 नवंबर 2025 को हुए पुनः भूमिपूजन में कोरबा विधायक एवं उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन और कोरबा महापौर संजू देवी राजपूत शामिल हुए, जिसके बाद निर्माण कार्य और तेजी से शुरू कर दिया गया।

शासन-प्रशासन की चुप्पी और बालको प्रबंधन की मनमानी पर स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है, और सवाल उठ रहे हैं कि क्या नियम-कानून सिर्फ आम नागरिकों के लिए हैं, या बड़ी कंपनियां उनसे ऊपर हैं?

यह मामला कोरबा जिले में प्रशासनिक निष्क्रियता और बालको प्रबंधन के अड़ियल रवैये का बड़ा उदाहरण बनकर उभर रहा है।

 

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