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करोड़ो के दागी प्रभारी को फिर दिया खरीदी का चार्ज, ग्रामीणों में आक्रोश

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जांजगीर-चांपा संवाददाता – राजेन्द्र जायसवाल
सेवा सहकारी समिति कोड़ाभाट  का मामला, ग्रामीणों ने की जिला कलेक्टर को शिकायत
विष्णु के सुशासन में प्रशासनिक  लापरवाही या मिलीभगत का बड़ा खेल
  जांजगीर-चांपा। सेवा सहकारी समिति मर्यादित कोड़ाभाट में पूर्व में करोड़ों की वित्तीय अनियमितताओं के आरोप में पदच्युत किए जा चुके विक्रेता सनत कुमार यादव की पुनः नियुक्ति ने जिले की सहकारी प्रणाली की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह मामला सिर्फ एक कर्मचारी के पदच्युति और पुनर्नियुक्ति का नहीं, बल्कि संपूर्ण सहकारिता व्यवस्था, उसके नियमन और प्रशासनिक जवाबदेही के पतन का दर्पण बनकर सामने आया है।शिकायतकर्ता प्रशांत कुमार यादव द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज़ों के अनुसार  सनत कुमार यादव के विरुद्ध कोड़ाभाट समिति में विक्रेता और प्रभारी संस्था प्रबंधक रहते हुए करोड़ों रुपये की वित्तीय अनियमितताएँ पाई गई थीं। जांच के बाद उन्हें पदच्युत किया गया था। यह कार्रवाई केवल औपचारिक नहीं थी, बल्कि तथ्यात्मक अनियमितताओं के आधार पर की गई थी, जिसमें उच्च अधिकारियों को शिकायतें की गई थीं और अनियमितताएँ प्रमाणित पाई गईं।इसके बाद भी यादव ने कूटरचित प्रस्ताव निर्माण कर स्थानांतरण आदेश प्राप्त किया और भैसों समिति में पहुँचे जहाँ वे पुनः अनियमितताओं में पकड़े गए और दूसरी बार पदच्युत हुए। इस प्रकार दो समितियों से पदच्युति होने के बाद भी उनका पुनः नियुक्त हो जाना यह दर्शाता है कि सहकारिता संस्थाओं में अनुशासन और जवाबदेही का ढांचा किस हद तक कमजोर हो चुका है। यह नियम स्पष्ट है, परंतु समिति के जिम्मेदार पदाधिकारियों द्वारा इसे ठेगा दिखा दिया गया जिससे यह संदेह और गहरा होता है कि पूरी प्रक्रिया में मिलीभगत से निर्णय लिया गया है।
समिति अध्यक्ष पर गंभीर आरोपनिष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न
शिकायत में समिति अध्यक्ष छोटेलाल पिता बालचंद सिंह पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने नियमों को दरकिनार करते हुए 09 जुलाई 2025 को  सचत कुमार यादव की पुनर्नियुक्ति की और उन्हें धान खरीदी जैसे संवेदनशील कार्य का प्रभारी बना दिया। धान खरीदी एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें भारी वित्तीय लेनदेन होता है—ऐसे में अनियमितताओं के इतिहास वाले व्यक्ति को जिम्मेदारी सौंपना स्वयं में प्रशासनिक विवेक का गंभीर दुरुपयोग है।
कूटरचना, गुमराही और भ्रष्टाचार का  खेल
शिकायत के साथ प्रस्तुत साक्ष्यों में आरोप लगाया गया है कि समिति प्रस्तावों में कूटरचना की गई, अधिकारियों को गुमराह किया गया,गंभीर वित्तीय अनियमितताओं को छिपाया गया,और सेवा नियमों का खुला उल्लंघन किया गया। ये आरोप केवल एक व्यक्ति पर नहीं, बल्कि पूरी संरचना पर सवाल उठाते हैं। यह मामला अब सहकारी समितियों की साख पर संकट पैदा करने लगा है।
जिला सहकारिता विभाग और जिला प्रशासन की भूमिका क्यों हो रही है देरी
चूंकि प्रकरण सीधा सेवा नियमों, वित्तीय अनुशासन और न्यायिक आदेशों से जुड़ा है, प्रशासन का तत्काल हस्तक्षेप जरूरी था।
पर सवाल यह है कि क्या विभाग ने पुनर्नियुक्ति आदेश की वैधता जाँची,
क्या जारी प्रकरण के न्यायिक स्थिति को ध्यान में रखा गया, क्या जिले के उच्च अधिकारियों तक तथ्य व्यवस्थित रूप से पहुँचे, यदि इन प्रश्नों का उत्तर नहीं  है, तो यह सहकारिता विभाग और प्रशासन दोनों की निरपेक्षता और जवाबदेही पर गंभीर आक्षेप है। ग्रामीणों ने प्रशासन से चार प्रमुख मांगें की सनत कुमार यादव की पुनर्नियुक्ति तत्काल निरस्त की जाए।  समिति अध्यक्ष पर सेवा नियम उल्लंघन के लिए कठोर कार्रवाई हो। न्यायालयीन प्रक्रिया प्रचलित रहते नियुक्ति को अवमानना मानते हुए दोषियों पर दंडात्मक कार्रवाई हो। समिति को हुए आर्थिक नुकसान की वसूली दोषी कर्मचारियों से की जाए। अब देखना यह होगा कि क्या जिला प्रशासन इस संवेदनशील मामले में त्वरित और पारदर्शी कार्रवाई करता है या दागी प्रभारी को अभयदान देगा।
आपके द्वारा उक्त प्रकरण की जानकारी मिली है उक्त प्रकरण पर निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
जन्मेजय महोबे
कलेक्टर, जांजगीर चांपा

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