जांजगीर चांपा संवाददाता – राजेन्द्र जयसवाल
जिला जांजगीर चांपा गौद धानमंडी में इन दिनों किसानों की खून-पसीने की कमाई पर खुलेआम डाका डाला जा रहा है। राज्य सरकार द्वारा स्पष्ट नियम निर्धारित किए जाने के बावजूद मंडी प्रबंधक प्रभारी किसानों को लगातार ठगने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। यह स्थिति न केवल किसानों के साथ अन्याय है, बल्कि शासन की मंशा और नियमों का खुला उल्लंघन भी है।

राज्य सरकार विष्णु देव साय के नेतृत्व में किसानों के हित में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी कर चुकी है कि धान तौल के समय 40 किलो 700 ग्राम से अधिक नहीं लिया जाएगा। इसका उद्देश्य यह है कि किसानों को उनकी उपज का पूरा मूल्य मिले और किसी भी स्तर पर उनकी मेहनत का शोषण न हो। लेकिन गौद धानमंडी की हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। यहां मंडी प्रबंधक प्रभारी द्वारा 41 से 42 किलो तक धान लिया जा रहा है, जो सीधे-सीधे किसानों की जेब पर डाका है।
हर बोरी में कटौती, किसानों की जेब पर भारी मार
अगर एक-एक बोरी में 1 से 1.5 किलो अतिरिक्त धान लिया जा रहा है, तो सोचिए सैकड़ों बोरियां बेचने वाले किसान को कितना नुकसान उठाना पड़ रहा होगा। यह नुकसान किसी एक किसान तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी मंडी के किसानों की मेहनत को निगल रहा है। किसानों का कहना है कि वे मजबूरी में चुप हैं, क्योंकि विरोध करने पर धान खरीदी में अड़चनें डाली जाती हैं।

शासन के नाम पर मनमानी
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब सरकार ने नियम तय कर दिए हैं, तो फिर मंडी प्रबंधक प्रभारी किसके आदेश पर किसानों से ज्यादा धान ले रहे हैं? क्या यह शासन की जानकारी में हो रहा है या फिर अधिकारियों की मिलीभगत से नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं? यह स्थिति प्रशासनिक निगरानी पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।
किसानों में आक्रोश, कार्रवाई की मांग
गौद धानमंडी के किसान इस अन्याय से बेहद आक्रोशित हैं। उनका कहना है कि अगर जल्द ही इस लूट पर रोक नहीं लगी, तो वे आंदोलन के लिए मजबूर होंगे। किसानों ने जिला प्रशासन और खाद्य विभाग से मांग की है कि
गौद धानमंडी में तत्काल जांच कराई जाए
दोषी मंडी प्रबंधक प्रभारी पर कड़ी कार्रवाई हो
सरकार द्वारा निर्धारित 40 किलो 700 ग्राम के नियम का सख्ती से पालन कराया जाए
धानमंडी किसानों के लिए राहत का केंद्र होनी चाहिए, न कि शोषण का अड्डा। गौद धानमंडी
धानमंडी किसानों के लिए राहत का केंद्र होनी चाहिए, न कि शोषण का अड्डा। गौद धानमंडी में जो कुछ हो रहा है, वह किसानों के साथ विश्वासघात है। यदि समय रहते प्रशासन ने सख्त कदम नहीं उठाए, तो यह लूट और भी बढ़ेगी। अब जरूरत है कि सरकार और जिला प्रशासन किसानों की आवाज सुने और दोषियों पर ऐसी कार्रवाई करे, जो भविष्य में किसी को किसानों की मेहनत लूटने की हिम्मत न दे।









