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पेसा कानून का खुलकर मखौल उड़ा रहे हैं बीजापुर के डीएफओ: विक्रम मंडावी

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बस्तर संवाददाता – अर्जुन झा

अनुसूचित क्षेत्र में ग्रामीणों और ग्रामसभा और की बिना सहमति पेड़ों की कटाई पर बिफरे विधायक मंडावी  आदिवासियों की आस्था से जुड़े हैं जल, जंगल और जमीन: विक्रम मंडावी
जगदलपुर। बस्तर के बीजापुर के विधायक विक्रम मंडावी ने अपने जिले में वन विभाग द्वारा छंटाई के नाम पर की जा रही पेड़ों की बेतहाशा कटाई पर कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने बीजापुर डीएफओ पर पेसा कानून का खुला उल्लंघन करने का आरोप लगाते हुए उन्हें तत्काल बीजापुर से हटाने की मांग उठाई है।

आज प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए विधायक विक्रम मंडावी ने कहा कि बस्तर संभाग का बीजापुर जिला आदिवासी बहुल क्षेत्र है, जहां संविधान की पांचवीं अनुसूची लागू है। 25 जनवरी 1994 से पंचायती राज व्यवस्था के साथ ही प्रदेश में पेसा कानून भी लागू है। इनके तहत ग्रामसभा सर्वोपरि है और गांव में किसी भी विकास कार्य के लिए ग्राम सभा की सहमति अनिवार्य है। यह संवैधानिक एवं लोकतांत्रिक प्रक्रिया हमारे लोकतंत्र को मजबूत करती है। श्री मंडावी ने कहा कि पिछले कुछ दिनों से बीजापुर का वन विभाग संविधान की पांचवीं अनुसूची, पंचायती राज व्यवस्था, पेसा कानून और ग्राम सभा की भावना का सम्मान नहीं कर रहा है और इन कानूनों को दरकिनार कर बिना ग्रामीणों की सहमति के मशीनों से अंधाधुंध वनों की कटाई की जा रही है।विधायक विक्रम मंडावी को ग्रामीणों ने बताया कि जब ग्रामीणों ने बिना ग्रामसभा और बिना ग्रामीणों की सहमति से वनों की मशीनों से कटाई का विरोध किया तो डीएफओ द्वारा उन्हें जेल भेजने की धमकी दी जा रही है। विक्रम मंडावी ने जिले के पेद्दाकोडेपाल और कांवड़गांव के दौरा कर मौक़ा मुआयना भी किया है। आगे विधायक ने कहा कि ग्रामीणों से मुलाकात और चर्चा के दौरान ग्रामीणों ने उन्हें यह भी बताया है कि दोनों गांवों में वन विभाग अब तक हजारों की संख्या में पेड़ों की कटाई मशीनों के जरिये कर चुका है।

विधायक ने कहा कि बीजापुर के डीएफओ और वन विभाग का यह रवैया आदिवासी ग्रामीणों तथा वन विभाग के बीच अविश्वास पैदा कर रहा है, जिसे तत्काल दूर किया जाना चाहिए था लेकिन डीएफओ और वन विभाग ऐसा नहीं कर रहे हैं। विधायक विक्रम मंडावी ने प्रेस वार्ता में आगे कहा कि जल, जंगल और जमीन आदिवासियों की आस्था एवं जीवन का आधार हैं। इसे वन विभाग और डीएफओ को समझने की जरूरत है।

शाह-साय की मंशा क्या?
डीएफओ बीजापुर द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति का उल्लेख करते हुए विधायक ने कहा कि डीएफओ बीजापुर को स्पष्ट करना चाहिए कि गृहमंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की ऐसी कौन सी मंशा है, जिसका हवाला देकर जंगलों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है और विरोध करने वाले ग्रामीणों को जेल भेजने की धमकी दी जा रही है।
इस पूरे घटनाक्रम को विधायक विक्रम मंडावी ने डीएफओ एवं वन विभाग द्वारा ग्रामीणों के साथ दादागिरी करने का आरोप लगाते सवाल पूछा है कि इतने दिनों तक वन विभाग क्षेत्रों में क्यों गायब था? अब अचानक मशीनें लेकर क्यों घुस आए? बिना ग्रामसभा, बिना ग्रामीणों, बिना जनप्रतिनिधियों की सहमति के यह काम क्यों? पेसा कानून का पालन क्यों नहीं किया जा रहा? ग्रामीण विरोध करें तो डीएफओ और अधिकारी जेल भेजने की धमकी क्यों देते हैं? यह लोकतंत्र है या तानाशाही? पूरे मामले को गुपचुप तरीके से क्यों अंजाम दिया जा रहा? विभाग क्या छिपा रहा है? सूखे पेड़ों के नाम पर हरे-भरे पेड़ क्यों काटे जा रहे? बिना चिन्हांकन के पेड़ काटना कानूनी अपराध है या नहीं? पेड़ों की कटाई के संबंध में सरकारी आदेश, नियम और प्रक्रिया क्या हैं? क्या वनों की कटाई को लेकर अखबारों में इश्तिहार जारी किया गया था? श्री मंडावी ने इन सवालों का जवाब ग्रामीण और हम सभी जानना चाहते हैं, डीएफओ और वन विभाग को इन सभी सवालों के जवाब देना चाहिए।

दादागिरी कर रहे हैं डीएफओ
विधायक विक्रम मंडावी ने प्रेसवार्ता में यह भी कहा कि डीएफओ जिस तरह ग्रामीणों को डरा रहे हैं, गांवों में जाकर दादागिरी कर रहे हैं और सवाल पूछने वाले ग्रामीणों को जेल भेजने की धमकी दे रहे हैं, उन्हें यह स्पष्ट करना चाहिए कि वे ग्रामसभा जैसी संवैधानिक संस्था को मानते हैं या नहीं?
विधायक विक्रम मंडावी ने आगे कहा कि ये सब प्रदेश में जब से भाजपा की डबल इंजन की सरकार बनी है तब से लगातार आदिवासियों को परेशान करने और डराने धमकाने का काम किया जा रहा है। इसके साथ ही विधायक विक्रम मंडावी ने सरकार से मांग की कि बीजापुर के डीएफओ को तत्काल यहां…

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