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जल, जंगल, खनिज और जमीन का विनाश कर रहे हैं रेत माफिया

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बस्तर संवाददाता – अर्जुन झा

बकावंड विकासखंड के नंदीगुड़ा में अवैध रेत खनन का खुला खेल 

बकावंड। बस्तर के नेता और आम आदमी यह दुहाई देते नहीं थकते कि बस्तर के जल, जंगल, जमीन और खनिज पर सबसे पहला हक यहां के निवासियों और आदिवासियों का है। मगर इस हक पर रेत माफिया डाका डाल रहे हैं।विकासखंड बकावंड की ग्राम पंचायत जैबेल के आश्रित ग्राम नंदीगुड़ा में पिछले लंबे समय से दिनों अवैध रेत खनन और परिवहन का खेल खुलेआम चल है। ग्रामीणों के अनुसार प्रतिदिन नदी एवं आसपास के क्षेत्रों से रेत निकाल कर भारी वाहनों और ट्रैक्टरों के माध्यम से नियमों को दरकिनार कर परिवहन किया जा रहा है।

रेत माफिया खनन नियमों का खुलकर उल्लंघन तो कर रही हैं, पर्यावरण को भी भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं। इसके बावजूद संबंधित विभागों द्वारा अब तक कोई ठोस और प्रभावी कार्रवाई नहीं किए जाने से प्रशासन की भूमिका पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अवैध रेत खनन और उसकी भारी वाहनों से ढुलाई के कारण गांव की सड़कों की स्थिति लगातार बदतर होती जा रही है। भारी वाहनों की आवाजाही से सड़कें पूरी तरह जर्जर हो चुकी हैं, जिससे आम ग्रामीणों, स्कूली बच्चों और बुजुर्गों को आवागमन में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं तेज रफ्तार ट्रैक्टरों और डंपरों की वजह से दुर्घटनाओं की आशंका भी बनी हुई है, जिससे ग्रामीणों में भय का माहौल है।

पर्यावरण पर खतरे के बादल

पर्यावरणीय दृष्टि से भी यह अवैध उत्खनन गंभीर खतरा बनता जा रहा है। नदी किनारों का लगातार कटाव हो रहा है और जल प्रवाह की दिशा भी बदल रही है। जिससे प्राकृतिक संतुलन बिगड़ने की स्थिति उत्पन्न हो गई है। ग्रामीणों को आशंका है कि यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई, तो भविष्य में जलस्तर में गिरावट और जल संकट जैसी गंभीर समस्याएं पूरे क्षेत्र को झेलनी पड़ सकती हैं। वहीं तटों के कटाव बारिश के मौसम में बाढ़ का पानी गांवों तक पहुंचकर भारी नुकसान पहुंचा सकता है।

कौन कर रहा है अवैध वसूली?
मामला उस समय और गंभीर हो गया जब अवैध रेत ढुलाई की सूचना पर नंदीगुड़ा पहुंचे मीडिया कर्मियों को कमलू कश्यप द्वारा बाइक अड़ा कर आगे जाने से रोका गया। आरोप है कि कुछ लोगों ने मीडिया कर्मियों को जान से मारने की धमकी दी और यह कहते हुए गांव में प्रवेश से मना किया कि यह पांचवीं अनुसूची क्षेत्र है, इसलिए मीडिया को यहां आने की अनुमति नहीं है। आरोपियों द्वारा यह भी दावा किया गया कि वे प्रतिदिन 200 रुपए की रॉयल्टी देते हैं, लेकिन जब उनसे संबंधित दस्तावेज दिखाने को कहा गया तो कोई भी वैध कागजात प्रस्तुत नहीं किया जा सका। इससे अवैध रूप से धन वसूली किए जाने की आशंका और गहराती नजर आई। सवाल यह है कि रेत माफियाओं से यह अवैध वसूली कौन कर रहा है? वहीं, एक ड्राइवर द्वारा वीडियो बनाकर उसे वायरल करने की धमकी दिए जाने की बात भी सामने आ रही है।

खनिज विभाग की चुप्पी पर सवाल
ग्रामीणों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि इस पूरे मामले में माइनिंग विभाग की रहस्यमय चुप्पी चिंता का विषय बनी हुई है। न तो नियमित निरीक्षण हो रहा है और न ही किसी प्रकार की सख्त कार्रवाई दिखाई दे रही है। ऐसे में लोगों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि कहीं अवैध रेती उत्खनन में विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत तो नहीं है।
जल, जंगल और जमीन बचाने के दावे केवल कागजों तक सीमित नजर आ रहे हैं, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से तत्काल जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है, ताकि अवैध खनन पर रोक लग सके और क्षेत्र को भविष्य के बड़े संकट से बचाया जा सके।

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