सक्ति संवाददाता – दीपक ठाकुर
जांजगीर–सच्ची दोस्ती में धन पद बाधा नहीं बनती जैसे कृष्ण सुदामा की मित्रता को देखने से मिलता है ग्राम भंवरमाल में बाबूलाल बरेठ निवास में आयोजित संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा ञानयज्ञ के सातवें दिन श्रीकृष्ण सुदामा की मित्रता पर कथा का रसापान कराते हुए कथावाचक पं नागेंद्र चतुर्वेदी ने कहा कि सुदामा कृष्ण की मित्रता बहुत ही प्रचलित है सुदामा बहुत गरीब ब्राह्मण थे। अपने बच्चों का पेट भर सके उतने भी सुदामा के पास पैसे नहीं थे सुदामा की पत्नी ने कहा हम भले ही भूखे रह जाएं लेकिन बच्चों को पेट भरना चाहिए न इतना बोली बोलते उसकी आंखों में आंसू आ गए सुदामा को बहुत दुख हुआ उन्होंने कहा ,, क्या कर सकते किसी के पास मांगने थोड़े ही जा सकते पत्नी ने सुदामा से कहा आप क ई बार कृष्ण की बात करते हो उनके साथ बहुत मित्रता है ऐसा कहते हो तो व्दारका के राजा हैं वहां क्यों नहीं जाते जाइए वहां कुछ भी मांगना नहीं पड़ेगा सुदामा की पत्नी की बात सही लगी सुदामा के व्दारका जाने का तय किया पत्नी से कहा ठीक है मैं कृष्ण के पास जाऊंगा लेकिन उसके बच्चों के लिए क्या लेकर जाऊं सुदामा की पत्नी पड़ोस में से पोहे ले आई उसे फटे हुए कपड़े में बांधकर उसकी पोटली बनाई सुदामा उस पोटली को लेकर व्दारका जाने के लिए निकल पड़े व्दारका देख सुदामा तो दंग रह गए पूरी नगर सोने की थी लोग बहुत सुखी थे सुदामा पूछते पूछते कृष्ण के महल तक पहुंचे दरवान ने साधु जैसे लगने वाले सुदामा से पूछा एवं यहां क्या काम सुदामा ने जवाब दिया मुझे कृष्ण से मिलना है उसने अंदर जाकर कहिए कि सुदामा आपसे मिलने के लिए आया है

दरवान ने सुदामा के वस्त्र देखकर ही आया जाकर कृष्ण को बताया कि सुदामा मिलना के लिए आया है इतने में कृष्ण सुदामा का नाम सुनते ही कृष्ण खड़े हो गए और सुदामा से मिलने दौड़ सभी आश्चर्यचकित रह गए कहां राजा और कहां ये साधू कृष्ण सुदामा को महल में ले गए सांदीपनि त्र्टि के गुरूकुल के दिनों की यादे ताजा की सुदामा कृष्ण की समृद्धि देखकर शर्मा ग ए सुदामा थोड़े सी पोटली छुपाने लगे लेकिन कृष्ण ने खींच ली कृष्ण ने उनसे पोहे निकाले और खाते हुए बोला अमृत जैसा स्वाद मुझे किसी को नहीं मिला बाद में दोनों खाना खाने बैठे सोने की थाली में भोजन परोसा गया सुदामा का दिल भर आया उन्हें याद आया कि घर पर बच्चों को पूरा पेट भर खाना भी नहीं मिलता है सुदामा यहां दो दिन रहे वे कृष्ण के पास कुछ मांग नहीं सके तीसरे दिन वापस घर जाने के लिए निकले कृष्ण सुदामा के गले लगे और थोड़ी दूर तक छोड़ने ग ए घर जाते हुए सुदामा को विचार आया घर पर पत्नी पूछेगी कि क्या लाए हो तो क्या जवाब दूंगा सुदामा घर पहुंचे वहां उसे अपनी झोपड़ी नजर नहीं आई उतने में ही एक सुंदर कपड़े पहने हुए थे पत्नी ने सुदामा से कहा देखा कृष्ण का प्रताप हमारी गरीबी चली गई कृष्ण ने हमारे सारे दुख दूर कर दिए सुदामा को कृष्ण का देखकर कुछ यादे और उनकी आंखों में ख़ुशी के आंसू आ गए।इस मौके पर यजमान बाबूलाल बरेठ उर्मिला बरेठ कमलकिशोर बरेठ ऐश्वर्या बरेठ नंदकिशोर बरेठ दुर्गेश्वरी विमल किशोर बरेठ वर्षा बरेठ जिला पंचायत महिला विकास सभापति मोहन कुमारी पत्रकार चित्रभानू पाड़ेय जितेन्द्र तिवारी पंचराम कश्यप राजेन्द्र कश्यप क्रांति कश्यप देवचंद हर्षित सौरभ अजय अभय चंद्रप्रकाश सा्हू कुणाल सुमीत हर्षकांत रजक पूनम रजक दामिनी भूमि साक्षी प्रभा मन्टू वीना स्मृता मनोरमा माधुरी अनिता राजकुमारी सुशीला दशोदा के अलावा भारी संख्या में भक्तगण उपस्थित थे।
संगीतधून से झूम उठे बाबूलाल बरेठ निवास में आयोजित संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा ञानयज्ञ यज्ञ में रायगढ़ देवरी म्यूजिक ग्रुप गायक विजय चौहान आर्गन दादू राम पैड़ राज साहू ढोलक संतोष कुमार की सुमधुर संगीत से पंडाल में उपस्थित सभी श्रोताओं को नाचने के लिए विवश कर देता है तथा इनकी संगीत से सभी लोगों के व्दारा देर रात तक भक्ति में डूबे हुए हैं।









