रायपुर, [दिनांक]
छत्तीसगढ़ के युक्तिकरण प्रताड़ित शिक्षकों ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को एक खुला पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने अपनी व्यथा व्यक्त की है। शिक्षकों का कहना है कि युक्तिकरण की आड़ में अधिकारियों की मनमानी और अपारदर्शिता ने उन्हें सड़कों पर आवाज़ उठाने को विवश कर दिया है।
शिक्षकों का आरोप है कि बिना दावा-आपत्ति के दूषित सूची पर जबरन काउंसलिंग की जा रही है, जो प्राकृतिक न्याय, सेवा नियमों और शासन की घोषित प्रक्रिया का उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय के आदेश के बाद भी न मूल संस्था में कार्य करने दिया जा रहा है और न ही पिछले 6-7 माह से वेतन दिया जा रहा है, जो जीवन जीने के मौलिक अधिकार का हनन है।
शिक्षकों ने कहा कि 2008 के सेटअप के विरुद्ध कार्रवाई की जा रही है और सदन में असत्य कथन किया गया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री समन्वय के आदेश के बाद भी नई मनमानी की जा रही है, जो सरकार की बदनामी का कारण बन रही है।
शिक्षकों ने कहा कि वे जीवन जीने के मौलिक अधिकार का हनन होने से और परिवार की बिगड़ी माली स्थिति को मद्देनजर रखते हुए मुख्यमंत्री जनदर्शन कार्यक्रम में इच्छा मृत्यु की अनुमति मांग रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे आत्महत्या करने के लिए मजबूर होंगे।
शिक्षकों ने मुख्यमंत्री से अपील की है कि वे उनकी समस्याओं को सुनें और अधिकारियों की मनमानी को रोकें। उन्होंने कहा कि वे शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगें रख रहे हैं और उम्मीद करते हैं कि सरकार उनकी बात सुनेगी।
“शासन-प्रशासन के चक्कर, समिति में सिर्फ धमकी”
प्रभावित शिक्षकों का कहना है कि वे लगातार शासन-प्रशासन के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही. जब अधिकारी कहते हैं समिति के पास जाओ, तो वहां जाने पर डराया-धमकाया जाता है. बिना जांच के आवेदन खारिज कर दिए जा रहे हैं और उनकी पीड़ा को अनसुना किया जा रहा है.
“7 महीने से वेतन नहीं… घर चलाना मुश्किल”
कई शिक्षकों ने बताया कि युक्तियुक्तकरण के बाद से उन्हें 6 से 7 महीने से वेतन नहीं मिला है. हालात इतने खराब हो चुके हैं कि घर चलाना मुश्किल हो गया है. एक शिक्षक ने कहा कि रिटायरमेंट में सिर्फ ढाई साल बचे हैं, दोनों घुटनों में गंभीर समस्या है, फिर भी उसे हटा दिया गया और जूनियर को रख लिया गया.









