ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के रुख के खिलाफ विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। हालात यह हैं कि ग्रीनलैंड की सड़कों पर हजारों लोग प्रदर्शन के लिए उतर आए हैं। प्रदर्शनकारियों ने साफ शब्दों में कहा कि ग्रीनलैंड किसी भी हाल में बिकाऊ नहीं है और वे किसी बाहरी दबाव को स्वीकार नहीं करेंगे।
प्रदर्शन के दौरान लोगों ने ट्रम्प के बयानों और नीतियों के खिलाफ नारे लगाए और ग्रीनलैंड की संप्रभुता की रक्षा करने की बात कही। स्थानीय नेताओं का कहना है कि ग्रीनलैंड के भविष्य का फैसला वहां की जनता करेगी, न कि कोई बाहरी ताकत।
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इस पूरे घटनाक्रम का असर अब अंतरराष्ट्रीय व्यापार संबंधों पर भी दिखने लगा है। यूरोपीय संघ ने अमेरिका के साथ चल रहे ट्रेड एग्रीमेंट को फिलहाल रोकने की तैयारी शुरू कर दी है। यूरोपीय संघ के अधिकारियों का कहना है कि यदि ग्रीनलैंड को लेकर दबाव की राजनीति जारी रही, तो अमेरिका के साथ व्यापारिक समझौतों पर पुनर्विचार किया जाएगा।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, ग्रीनलैंड मुद्दे पर बढ़ता यह टकराव अमेरिका और यूरोप के रिश्तों में नई दरार पैदा कर सकता है। वहीं, ग्रीनलैंड में जारी जन आंदोलन ने यह साफ कर दिया है कि वहां की जनता किसी भी तरह के अधिग्रहण या सौदे के खिलाफ एकजुट है।









