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अपने समृद्ध अतीत की ओर लौट रहा है बस्तर!

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= सुलझते जा रहे हैं बस्तर की वादियों के अनसुलझे रहस्य अब =
= माड़ क्षेत्र की तुलार गुफा में पहली बार पड़े अफसरों के कदम =
= भगवान शिव विराजमान हैं दुर्गम तुलार गुफा में =
=दुर्गम पहाड़ियों और दुरूह घाटियों तक होने लगी है अब आमजन की पहुंच =
= नक्सल उन्मूलन ने अब राह बना दी है आसान =
-अर्जुन झा-
जगदलपुर। समृद्धि और शांति की ओर बस्तर के कदम तेजी से बढ़ रहे हैं।बस्तर अब अपनी समृद्ध अतीत की ओर लौट रहा है। वह अतीत जिसमें बस्तरिहा गीत संगीत, विरासत, गुफाएं, देव स्थान और शांति समाहित हैं। बस्तर संभाग का अबूझमाड़ क्षेत्र अब अनबुझा नहीं रह गया है। अबूझमाड़ वह क्षेत्र है, जहां जाने की कल्पना मात्र से लोग सिहर उठते थे। अब अबूझमाड़ के अति दुर्गम स्थानों तक जिला स्तर के बड़े अधिकारी भी पहुंचने लगे हैं। डेड लाइन के दो माह पहले ही बस्तर की वादियां झूमने लगी हैं।


दशकों से नक्सल आतंकवाद की त्रासदी झेलते आए बस्तर में अब अमन की बयार बहने लगी है। नक्सलवाद ने बस्तर संभाग की कई प्राचीन देव स्थलों पर भी ग्रहण लगा दिया था। नक्सलियों ने बस्तर की कई पहाड़ियों पर कब्जा कर रखा था। खासकर बीजापुर जिले की पहाड़ियां नक्सलियों के कब्जे में थीं। चाहे कर्रेगुट्टा हो तुलार गुफा वाली पहाड़ी। इन पहाड़ियों पर कई अति प्राचीन देव स्थान और गुफाएं हैं। यहां नक्सलियों ने अपने छुपने, रसद और गोला, बारूद, हथियार रखने के अड्डे बना लिए थे। बीजापुर और नारायणपुर जिलों को कवर करने वाले अबूझमाड़ क्षेत्र नक्सलियों का सबसे सुरक्षित पनाहगाह बन गया था। इन पहाड़ियों और अबूझमाड़ क्षेत्र में नक्सलियों का ऐसा दबदबा हुआ करता था कि वहां जाने की कल्पना मात्र से लोग सिहर उठते थे। मगर अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। आम बस्तरिहा तो छोड़ो, जिला स्तर के वे बड़े अधिकारी भी, जो बिना चप्पल अपने बाथरूम में कदम नहीं धरते, अब वे भी इन दुरूह पहाड़ियों और दुर्गम अबूझमाड़ क्षेत्र में नंगे पांव पहुंचने लगे हैं। अभी हाल ही हमने एक बहुत ही सुंदर तस्वीर तब देखी थी, जब पांच हजार फीट ऊंची कर्रेगुट्टा पहाड़ी की चोटी पर हमारा प्यारा तिरंगा शान से लहरा उठा था। गणतंत्र दिवस के मौके पर यहां सीआरपीएफ, डीआरजी और अन्य सुरक्षा बलों के जवानों ने तिरंगा फहराया था। हाल में यह पहाड़ी नक्सली चंगुल से मुक्त कराई गई थी। अब दिल को सुकून देने वाली एक और खबर बस्तर संभाग के बीजापुर जिले से ही आई है। यहां अबूझमाड़ क्षेत्र की ग्राम पंचायत मंगनार, बोधघाट पार कर ग्राम बुड़दुम की पहाड़ी पर स्थित तुलार गुफा तक बीजापुर कलेक्टर संबित मिश्रा और सीईओ नम्रता चौबे पैदल पहुंच गए। क्षेत्र के ग्रामीणों मांग पर कलेक्टर संबित मिश्रा एवं जिला पंचायत सीईओ नम्रता चौबे, एसडीएम भैरमगढ़ विकास सर्वे, सीईओ जनपद पंचायत अभिषेक तम्बोली, क्षेत्र के जनपद सदस्य, सरपंच सचिव, ग्रामवासी तथा भैरमगढ़ पुलिस बल के साथ 10 किमी मोटर सायकल से फिर 5 किमी पैदल चल कर बुड़दुम गांव के भगवान शिव की पहाड़ी पर स्थित तुलार गुफा पहुंचे। इस आस्था के केंद्र शिव भगवान की तुलार गुफा में हर साल शिवरात्रि पर मेला लगता है। मेला के दौरान लोगों की पूजा-अर्चना के लिए भारी भीड़ होती है। ग्रामीणों ने कलेक्टर से कहा कि मेला में आने जाने वालों को सड़क व पेयजल न होने से काफी तकलीफ होती है। गुफा तक सड़क की स्वीकृति दी जाए। अधिकारियों को तुलार गुफा तक पहुंचने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। पहाड़ी पर स्थित होने से पैदल रास्ता तय करना पड़ा। कलेक्टर संबित मिश्रा का कहना है कि पर्यटन के लिए इस गुफा को विकसित किए जाने की आवश्यकता है। कलेक्टर संबित मिश्रा व सीईओ नम्रता चौबे ने ग्रामीणों से खुलकर बातचीत की तथा विभिन्न योजनाओं तथा विकास कार्यों के संबंध में जानकारी ली। अबूझमाड़ क्षेत्र के बुडदुम गांव में पहली बार अधिकारियों के पहुंचने पर ग्रामीणों ने खुशी जताई तथा अपने गांव में मूलभूत आवश्यकताओं की मांग की। नक्सल प्रभाव के चलते इस क्षेत्र के ग्रामीण अपनी मांगों को लेकर प्रशासन के पास पहुंच नहीं पाते थे। अब नक्सल प्रभाव कमजोर होने से ग्रामीणों में आत्मविश्वास बढ़ गया है। ग्रामीणों ने कलेक्टर से कहा की आवागमन के लिए सड़क व स्वास्थ्य शिक्षा तथा बिजली पानी की व्यवस्था करवा दीजिए साहब। कलेक्टर ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि जल्द इसके लिए पहल की जाएगी। भैरमगढ़ जनपद सीईओ ने बताया कि माड़ क्षेत्र इस गांव व गुफा तक पहुंचने में काफी समय लगा लेकिन वापसी होने में रात हो गई।

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